लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जनजाति विकास के हितधारकों के साथ बजट पूर्व चर्चा
अहम सुझावों को बजट में शामिल कर जनजाति कल्याण को दी जाएगी नई गति
जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जनजाति संस्कृति हमारे समाज की अमूल्य धरोहर है और राज्य सरकार पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के संकल्प को आत्मसात करते हुए जनजाति समाज के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में जनजाति विकास के हितधारकों के साथ बजट पूर्व चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत संस्थाएं समाज की वास्तविक आवश्यकताओं और चुनौतियों से भली-भांति परिचित होती हैं। इनसे प्राप्त सुझावों का विश्लेषण कर आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे प्रदेश में जनजाति कल्याण को नई दिशा मिल सके।
जनजाति संस्कृति से जुड़ रही नई पीढ़ी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजाति संस्कृति और वैभव के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है। जनजाति क्षेत्रों की महिलाओं द्वारा तैयार फूलों की गुलाल की खरीद कर आजीविका संवर्धन को प्रोत्साहित किया गया है।
उन्होंने बताया कि बेणेश्वर धाम और मानगढ़ धाम को ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट के तहत विकसित किया जा रहा है। बेणेश्वर धाम में सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर लगने वाले विशाल आदिवासी मेले को और भव्य स्वरूप दिया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी को जनजाति इतिहास और संस्कृति से जोड़ा जा सके।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आदिवासी गौरव को नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर वर्ष 2023 में शुरू किए गए पीएम-जनमन अभियान के तहत 9 मंत्रालयों की 11 योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत बारां जिले में अब तक लगभग 11 हजार प्रधानमंत्री आवास, 16 हजार से अधिक विद्युत कनेक्शन, 3,760 पेयजल कनेक्शन, 12 मल्टी परपज सेंटर और 11 संपर्क सड़कों के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। साथ ही 21 नए छात्रावास, 51 नए आंगनबाड़ी केंद्र और 51 वन धन केंद्र स्वीकृत किए गए हैं।
जनजाति बहुल गांवों का हो रहा सर्वांगीण विकास
मुख्यमंत्री ने बताया कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत पक्के मकान, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन के माध्यम से जनजाति बहुल गांवों का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है।
इस अभियान में राज्य के 6 हजार से अधिक गांवों का चयन किया गया है, जिससे लगभग 55 लाख जनजाति नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होगा। इसके साथ ही आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत 1 लाख 17 हजार से अधिक कर्मयोगियों को प्रशिक्षित किया गया है।
जनजाति कृषकों को सब्जी बीज मिनीकिट
मुख्यमंत्री ने कहा कि गत बजट में जनजाति विकास कोष की राशि को 1,000 करोड़ से बढ़ाकर 1,750 करोड़ रुपये किया गया।
डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा में डूंगर बरंडा और बांसिया चारपोटा में जनजाति नायकों के स्मारक तथा उदयपुर में वीर बालिका कालीबाई संग्रहालय का निर्माण कराया जा रहा है।
गत दो वर्षों में जनजाति क्षेत्रों में 9 आश्रम छात्रावास, 3 आवासीय विद्यालय, 1 खेल छात्रावास और 240 नए मां-बाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में मैस भत्ता बढ़ाकर 3,250 रुपये प्रतिमाह किया गया है।
इसके साथ ही खरीफ एवं रबी 2025-26 में 50 हजार जनजाति कृषकों को सब्जी बीज मिनीकिट वितरित किए गए हैं।
बैठक में उदयपुर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, सलूंबर, बारां, सिरोही सहित विभिन्न जिलों के जनजाति कल्याण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं ने शिक्षा, चिकित्सा, आधारभूत संरचना, रोजगार और सिंचाई से संबंधित सुझाव प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन अभय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव जनजाति क्षेत्रीय विकास कुंजी लाल मीणा, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया सहित वरिष्ठ अधिकारी और जनजाति क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।