लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
पादूकलां। कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण अंचल में बुधवार को जलझूलनी एवं परिवर्तिनी एकादशी का पर्व बड़े धूमधाम और श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया। बस्सी की ढाणी स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही।
मंदिर पुजारी पंडित पुखराज शास्त्री ने बताया कि इस अवसर पर बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया गया। भक्तों ने परिवार, समाज और देश की खुशहाली की कामना करते हुए बाबा श्याम के दर्शन किए।
भाद्रपद शुक्ल एकादशी को पद्मा एकादशी, परिवर्तिनी एकादशी, वामन एकादशी और डोल ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में करवट बदलते हैं और प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं। इस अवसर पर की गई पूजा-अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंदिर परिसर में एकादशी कथा वाचन भी हुआ, जिसमें बताया गया कि इस दिन माता यशोदा ने श्रीकृष्ण के वस्त्र जलाशय पर धोए थे। इसी कारण इसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।
शाम को मंदिर प्रांगण से भगवान विष्णु व बाबा श्याम की प्रतिमा को पालकी में बिठाकर ढोल-नगाड़ों और भजनों के बीच शोभायात्रा निकाली गई। इस अवसर पर रिया बड़ी सहित आसपास के गांवों से आए श्याम प्रेमियों ने पैदल यात्रा कर बाबा श्याम के दर्शन किए।
मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया। दिनभर मंदिर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ता रहा और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।















































