*जगन्नाथ  रथ यात्रा मार्ग को सोने की झाडू से बुहारते थे सांगा बाबा* 

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

*जितेन्द्र सिंह शेखावत* 
वरिष्ठ पत्रकार रा. प.

*भगवान जगन्नाथ जी का प्राचीन मंदिर सांगानेर में है।  वहां के राजा सांगा बाबा जगन्नाथ जी की रथ यात्रा के आगे सोने की झाडू अगवानी करते थे।* *
*जयपुर नहीं बस तब  आमेर महाराजा मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम के  समय जगन्नाथ की  रथयात्रा निकालती थी।* *जयपुर की स्थापना के बाद पुरानी बस्ती,  धाभाई जी का खुर्रा आदि* *स्थानों पर जगन्नाथ  के मंदिर बने। इनमें भगवान कृष्ण और* *भाई बलराम व बहन सुभद्रा की पूजा होती है ।*
*आषाढ़ शुक्ल  दूज को नगर में रथ यात्रा निकलती तब धार्मिक वातावरण जगन्नाथपुरी जैसा बन जाता।* *भगवान के रथ का रस्सा खींचने और स्पर्श करने  के लिए नर नारी उमड़ पड़ते।* *सवाई जयसिंह द्वितीय के समय में उड़ीसा में जगन्नाथ यात्रा के लिए धन राशि भेजी जाती थी ।*
*इतिहास के जानकार देवेंद्र भगत के मुताबिक उन दिनों हिन्दू विरोधी आक्रान्ता रथ यात्रा पर हमला  कर देते थे।* *स्वामी गोबिंदा नंद के* नेतृत्व में बालानंद मठ के नागा सैनिकों की* *बटालियन तैनात रहती । पुरी का प्रसाद भी जयपुर आता जिसे भक्तों को बांटा जाता । पुरानी बस्ती के बालानंद मठ से भी रथ यात्रा निकलती थी।*
*सांगानेर के जगन्नाथ मंदिर में सांगा बाबा  के अलावा सातों भौमिया जी भी विराजमान है। कभी इस मंदिर के  पुजारी  घासी महाराज थे।* *भडल्या नवमी को भगवान जगन्नाथ का सांगानेर मे मेला भरता । भक्तजन जगन्नाथ जी, सुभद्रा और बलभद्र जी के प्रसाद चढ़ाते हैं ।*  *आषाढ़ सुदी दूज को आषाढ़ी दशहरा पर महाराजा संत महंतों के साथ  दशहरा कोठी पर वैदिक मंत्रोचार से खेजड़ी ( शमी वृक्ष) का पूजन होता ।*
*संस्कृत विद्वान डा. सुभाष शर्मा के अनुसार नाहरगढ़ रोड पुराना  जगन्नाथ मंदिर है। आषाढ़ में  विशेष पूजा अर्चना के साथ प्रभु का अभिषेक* *होता है। इस* *मंदिर में भगवान अकेले विराजमान हैं। भगवान के खुले मुंह की झांकी का काष्ठ का बना विग्रह जयपुर की स्थापना के समय जगननाथपुरी से आया था। धाभाई जी का खुर्रा पर भी श्री जगन्नाथ जी का मंदिर हैं।*

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