लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)।
इंजीनियर्स दिवस के अवसर पर, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने अपने इंजीनियरों द्वारा पिछले पांच वर्षों में लाए गए महत्वपूर्ण बदलावों पर गर्व व्यक्त किया। वर्तमान में कंपनी में 55 प्रतिशत कार्यकारी पदों पर इंजीनियर कार्यरत हैं, जो तकनीकी विशेषज्ञता, नवाचार और समस्या-समाधान में कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कंपनी में अब 1,490 से अधिक कार्यकारी इंजीनियर हैं, जिनमें 270 से अधिक महिला इंजीनियर शामिल हैं। ये महिलाएं भूमिगत खानों, स्मेल्टरर्स, प्रयोगशालाओं और उन्नत प्रौद्योगिकी टीमों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में बाधाओं को तोड़ा है।
हिन्दुस्तान जिंक ने हाल ही में VLPD, GET, PGET और MT कार्यक्रमों के माध्यम से 300 युवा पेशेवरों का स्वागत किया। यह कदम कंपनी की प्रतिभा और नवाचार को और सशक्त बनाने के लिए उठाया गया।
सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा, “इंजीनियर हमारी सफलता की रीढ़ हैं। उनकी नवाचार और समस्या-समाधान की भावना भारत को आत्मनिर्भर और सस्टेनेबल बनाने में योगदान दे रही है।”
सिंदेसर खुर्द खदान की इंजीनियर कविता मीणा ने कहा, “डिजिटल और डेटा-संचालित उपकरण हमें कठिन समस्याओं को समाधान में बदलने में मदद करते हैं, जिससे उत्पादकता, सुरक्षा और ग्राहक सेवा में सुधार होता है।”
इंजीनियर टेली-रिमोट भूमिगत खनन, रियल-टाइम एनालिटिक्स, स्वचालन, रोबोटिक्स और डीकार्बोनाइजेशन जैसी तकनीकों को लागू कर संचालन को कुशल, सुरक्षित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बना रहे हैं।
हिन्दुस्तान जिंक का विविध और डिजिटल-फोकस्ड इंजीनियरिंग कार्यबल न केवल जिंक और चांदी में कंपनी की लीडरशिप मजबूत कर रहा है, बल्कि भारत के दीर्घकालिक औद्योगिक और आर्थिक विकास में भी योगदान दे रहा है।


















































