लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
हिंदी को मातृभाषा का सम्मान और हर दिन गर्व से बोलने का संदेश देती कविता
रचना: अन्नु राठौड़ ‘रुद्रांजली’
स्थान: राजसमंद
राजसमंद। हिंदी दिवस के अवसर पर कवयित्री अन्नु राठौड़ ‘रुद्रांजली’ ने हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, गौरव और आत्मीयता को शब्दों में पिरोते हुए भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की है। कविता में हिंदी को मातृभाषा बताते हुए आधुनिकता की दौड़ में अपनी भाषा को उचित सम्मान दिलाने की भावना व्यक्त की गई है।
कविता में तिरंगे, हिंदुस्तानी पहचान, मानवता और हिंदी भाषा को एक-दूसरे से जोड़ते हुए कवयित्री ने कहा है कि भाषाओं से किसी तरह का परहेज नहीं, लेकिन हिंदी हमारी मातृभाषा है और आधुनिकता की होड़ में भी उसे उचित सम्मान मिलना चाहिए।
कविता की खास पंक्तियों में कवयित्री सवाल उठाती हैं कि क्या हिंदी केवल एक दिन सम्मान की अधिकारी है या उसे पूरे साल वही सम्मान मिलना चाहिए? अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के बीच हिंदी बोलने में होने वाली झिझक पर भी कविता सवाल करती है।
वहीं हिंदी की वर्णमाला की विशेषताओं को भी कविता में बेहद सहज और रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। ‘अ’ से ‘ज्ञ’ तक के अक्षरों और स्वरों-व्यंजनों के संबंध के जरिए हिंदी की वैज्ञानिकता और विशिष्ट पहचान को रेखांकित किया गया है।
कविता के अंतिम अंश में कवयित्री अपनी भारतीय पहचान और हिंदी भाषा के प्रति गर्व व्यक्त करते हुए कहती हैं कि यदि उन्हें बार-बार जन्म लेने का अवसर मिले, तो हर बार उनकी इच्छा यही होगी कि जन्मभूमि के रूप में हिंदुस्तान की धरती ही मिले और हिंदी भाषा से ही उनकी शान बनी रहे।
हिंदी दिवस पर कविता का संदेश
कविता केवल हिंदी के सम्मान की बात नहीं करती, बल्कि यह भी संदेश देती है कि मातृभाषा का सम्मान किसी एक विशेष दिवस तक सीमित नहीं होना चाहिए। हिंदी को दैनिक जीवन, शिक्षा और सामाजिक संवाद में सहजता और गर्व के साथ अपनाने की जरूरत है।
