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हिमाचल 8 वर्षीय दलित छात्र से अमानवीय अत्याचार, प्रधानाध्यापक सहित तीन शिक्षक एपीओ

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
हिमाचल: 8 वर्षीय दलित छात्र से अमानवीय अत्याचार,  बच्चे का कान फटा, शौचालय में बिच्छू बूटी डाली
हिमाचल प्रदेश से दलित छात्र के साथ निर्मम अत्याचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कक्षा 1 में पढ़ने वाले एक 8 वर्षीय बच्चे ने आरोप लगाया है कि स्कूल के प्रधानाध्यापक देवेंद्र कुमार, शिक्षक बाबूराम और कृतिका ठाकुर पिछले कई दिनों से उसे लगातार प्रताड़ित कर रहे थे।
पीड़ित छात्र के पिता द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, बच्चे को लगातार पीटा जाता था, जिसके कारण उसके कान से खून बहने लगा और कान का पर्दा फट गया। इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपियों ने बच्चे को शौचालय में बंद कर उसकी पैंट में बिच्छू बूटी डाली, जो तेज जलन और दर्द पैदा करने वाला पौधा है।
पिता के अनुसार, शिक्षक बच्चे को धमकी देते थे कि यदि उसने किसी को बताया तो पुलिस उसे ही पकड़ लेगी। 30 अक्टूबर को प्रधानाचार्य ने बच्चे को स्कूल से निकालने की धमकी दी और मामला सार्वजनिक होने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। पिता ने बताया कि बच्चे ने कई बार शिकायत की, लेकिन शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य डर समझकर अनदेखा कर दिया। लगातार दर्द और भय से जूझते बेटे की हालत देखकर वे पुलिस के पास पहुंचे।
आरोप: शिक्षिका कृतिका ठाकुर अवैध रूप से पढ़ा रही थीं
शिकायत में यह भी कहा गया है कि शिक्षिका कृतिका ठाकुर पिछले एक वर्ष से बिना अनुमोदन के स्कूल में पढ़ा रही थीं, जबकि ड्यूटी पर कोई और नामित था।
एससी-एसटी एक्ट लागू होना चाहिए, पर कार्रवाई धीमी
दलित संगठनों का आरोप है कि यह साफ तौर पर अनुसूचित जाति के छात्र के साथ जातिगत अत्याचार का मामला है और एससी-एसटी एक्ट के तहत तुरंत मामला दर्ज होना चाहिए था, जो अब तक नहीं हुआ है।
एसपी ने जांच के आदेश दिए
शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और जांच जारी है। अपराधियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
शिक्षा विभाग भी जांच में जुटा
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पुलिस जांच के अलावा विभाग भी अपनी ओर से विस्तृत जांच कर रहा है। यह गंभीर आरोप हैं और तथ्यों की पुष्टि के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
दलित समुदाय में आक्रोश
दलित संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में अब भी मौजूद भेदभावपूर्ण मानसिकता को उजागर करती हैं। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर दलित बच्चों से स्कूलों में सफाई, गटर साफ करवाना और अन्य अपमानजनक कार्य करवाए जाते हैं।
समुदाय ने सरकार से मांग की है कि तीनों शिक्षकों को तुरंत बर्खास्त कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि आगे किसी बच्चे के साथ ऐसी अमानवीय हरकत दोबारा न हो।
पीड़ित बच्चा और उसका परिवार अब भी दहशत में है और उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।
चंद्रशेखर रावण ने की निष्पक्ष जांच की मांग
आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण ने इस मामले में सोशल मीडिया हैंडल पर अपनी बात रखते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को तीनों आरोपियों को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए।  पीड़ित बच्चों को सरकारी सुरक्षा, इलाज और मुआवजा दिया जाए।  साथ ही घटना की स्वतंत्र जांच हो और दोषियों पर एससी एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई हो।  वहीं हिमाचल प्रदेश में विपक्ष की दलों के नेताओं ने भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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