*हां मैं रामगढ़ बांध हूं.. अब जनता ही मुझे वापस जिंदा कर सकती है*

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

*जितेंद्र सिंह शेखावत* वरिष्ठ पत्रकार

*मैं रामगढ़ का बांध हूं और पिछले बीस साल से पानी के बिना मेरा पेट खाली है। करीब सात सौ वर्ग किलो मीटर के कैचमेंट एरिया में अच्छी बरसात के बाद बाण गंगा नदी मेरी तरफ आने लगती है लेकिन फार्म हाऊसों और अवैध कब्जों के सामने वह पस्त होकर हांफते हुए अपना दम तोड़ देती है।

अपनी खूबसूरती से चाहे मैंने दुनियां का दिल जीता हो ,मगर आज अपनों के ही दिए जख्मों से लहुलुहान हूं।
सच कहता हू ..अब मुझसे दुख सहा नहीं जाता ।
मेरे बदन ही नहीं गले तक जल पहुंचने वाली राह के अवरोधों ने मेरा दम तोड़ दिया है।
मुझ पर आए संकट का निवारण अब आम जनता ही कर सकती है।
मेरे दर पर आओ और मुझे संभालो । नहीं तो मैं कहीं का भी नहीं रहूंगा । बरसों तक रोजाना 60 लाख गैलन पानी पिलाया । मेरी मां बाण गंगा नदी को अर्जुन ने अपने तीर से प्रकट किया था। मेरे पौष्टिक जल के कारण ही तो यह कहावत …. जैपर डूब्यो खाबा मैं, प्रसिद्ध हुई । मेरे पानी से हाजमा सही रहता था। सैकड़ों किलो मीटर तक मेरी नहरों से उगने वाले अनाज
से किसानों के कोठयार भरते थे। इसलिए अब दिल से कहता हूं .. आम जनता ही अब मुझे वापस जिंदा कर सकती है।
मुझे संभालो । सांस आती नहीं मेरा उपचार आप नहीं करोगे तो फिर कौन करेगा । मुझे जीवन दायी कहते हो लेकिन आज मेरा जीवन खतरे के जाल जंजाल में उलझा है । ऐसा क्या गुनाह हुआ की वर्ष 2005 के बाद से प्यासे को भी एक बूंद पानी की नहीं पिला सकता ।
मेरे सूखने के बाद भू माफिया और नेताओं की तो बल्ले बल्ले हो गई । कई लोग
मेरे नाम पर चुनाव जीत गए । आंदोलन करने भी आए और चुप बैठ गए । अब मैं क्या जवाब दूं।पिछले साल सावन भादवा जोरदार बरसा था। मेरे इलाके में सघन हरियाली हो गई थी । बांध में जल नहीं होने की वजह से मेरी पाल पर पिकनिक की मौज मस्ती करने वाले और सावन के झूलों पर झूलने वाले नहीं आए । दाल बाटी चूरमा की गोठ का आनंद भी नहीं दे सका । एशियाई खेलों से से मेरा नाम दुनिया में मशहूर हुआ लेकिन अब सूखा हुआ बदनामी सी महसूस कर रहा हूं ।
पर्यटकों को नावों में सैर करने का मुझे गर्व है ।
रंग बिरंगी चिड़िया, सारस आदि पक्षियों एवं मगरमच्छों तक का ठिकाना छूट गया है । वर्षा कालमें तीतर पंखी बादली और पैर पटकती ऊंटनी के शगुन भी देखे। टिटहरी ने ऊंचाई पर चार अंडे भी दिए ओर चिड़िया ने धूल में नहा कर अच्छा शगुन किया । बरसात भी होती रही लेकिन मैं सूखा ही रहा । जयपुर को राजधानी बनाने की एक सबसे बड़ी वजह मैं रामगढ़ बांध ही रहा हूं ।आखिर में राम जी के घर न्याय तो होगा ।

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