लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
बजट इम्पैक्ट
गुरला (भीलवाड़ा)। राजस्थान सरकार द्वारा आगामी फरवरी माह में प्रस्तुत किए जाने वाले वार्षिक बजट को लेकर भीलवाड़ा जिले के गुरला क्षेत्र में उम्मीदें चरम पर हैं। वर्षों से लंबित बुनियादी सुविधाओं को लेकर स्थानीय जनता, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि इस बार बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल एवं परिवहन से जुड़ी जनहितैषी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए, ताकि “बदलेगी गुरला की तस्वीर” केवल नारा न रह जाए।
घोषणाओं के बावजूद ज़मीनी हकीकत जस की तस
सरकार एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई कई घोषणाओं के बावजूद गुरला क्षेत्र की अनेक मूलभूत एवं जीवनरक्षक मांगें अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं। लंबे समय से लंबित इन मांगों को लेकर ग्रामीणों में गहरी निराशा के साथ-साथ आक्रोश भी व्याप्त है।
गुरला की 6 प्रमुख लंबित मांगें
1. ट्रोमा सेंटर की आवश्यकता:
गुरला राष्ट्रीय राजमार्ग 758 पर स्थित है, जहां सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। गंभीर घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए एक अत्याधुनिक ट्रोमा सेंटर की सख्त आवश्यकता है, लेकिन यह मांग अब तक अनसुनी बनी हुई है।
2. विज्ञान संकाय की स्वीकृति:
स्थानीय स्तर पर विज्ञान संकाय (Science Stream) की सुविधा न होने से विद्यार्थियों को दूर-दराज़ के क्षेत्रों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है। कई छात्र 10वीं के बाद शिक्षा छोड़ने को मजबूर हैं।
3. फ्लोराइड मुक्त पेयजल:
क्षेत्र में फ्लोराइड युक्त पानी और पेयजल संकट गंभीर समस्या बना हुआ है। अमृत 2 योजना के अंतर्गत उच्च जलाशय (High Reservoir) निर्माण एवं शुद्ध पेयजल आपूर्ति की मांग अब भी लंबित है।
4. नया आयुर्वेदिक चिकित्सालय:
समग्र एवं वैकल्पिक चिकित्सा को बढ़ावा देने हेतु गुरला में नए आयुर्वेदिक चिकित्सालय की लंबे समय से मांग की जा रही है।
5. उच्च जलाशय का निर्माण:
पेयजल संकट से स्थायी राहत के लिए उच्च जलाशय का निर्माण अत्यंत आवश्यक है, जिस पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
6. रोडवेज बसों का ठहराव:
गुरला हाइवे पर स्थित प्रमुख गांव है और आसपास के अनेक ग्रामीण गुरला बस स्टैंड का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद राजस्थान रोडवेज के सभी आगारों की बसों का ठहराव यहां नहीं होता। गुरला को आधिकारिक रोडवेज बस स्टैंड घोषित करने की मांग लंबे समय से लंबित है।
स्थानीय लोगों में नाराज़गी
इन मांगों की लगातार उपेक्षा से ग्रामीणों में रोष बढ़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि—
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। फरवरी बजट में ट्रोमा सेंटर को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।”
“विज्ञान संकाय न होने से हमारे बच्चों का भविष्य अंधकार में है। सरकार को शिक्षा के अधिकार को गंभीरता से लेना होगा।”
“सालों से फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। यदि इस बार भी बजट में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं हुई तो आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय सामाजिक संगठनों एवं ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी फरवरी बजट में इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो हस्ताक्षर अभियान, धरना-प्रदर्शन एवं अन्य चरणबद्ध आंदोलनों की शुरुआत की जाएगी।
















































