लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
असम में सियासी घमासान:
गुवाहाटी/नई दिल्ली | असम की राजनीति में इन दिनों बड़ा सियासी तूफान देखने को मिल रहा है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। यह मामला अब राज्य की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।
क्या है पूरा मामला?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनके कुछ “संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय संपर्क” हैं, जिनकी जानकारी और कथित सबूत केंद्र सरकार को सौंपे गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो सकता है और इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए।
सरमा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने संबंधित दस्तावेज और इनपुट केंद्र के पास भेज दिए हैं ताकि केंद्रीय एजेंसियां इसकी जांच कर सकें।
₹500 करोड़ का मानहानि मुकदमा
विवाद उस समय और बढ़ गया जब मुख्यमंत्री सरमा ने ₹500 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर करने की घोषणा की। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप “झूठे और राजनीतिक रूप से प्रेरित” हैं।
इस कदम को असम विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
गौरव गोगोई का पलटवार
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “राजनीतिक स्टंट” बताया। उन्होंने कहा कि यह सब जनता का ध्यान असली मुद्दों—बेरोजगारी, महंगाई और भूमि विवाद—से हटाने के लिए किया जा रहा है।
गोगोई ने यह भी कहा कि अगर किसी बयान से कोई गलतफहमी हुई है, तो वे स्पष्टिकरण देने को तैयार हैं, लेकिन निराधार आरोप स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
कांग्रेस में हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच असम कांग्रेस में भी हलचल देखने को मिली। कुछ नेताओं के असंतोष और इस्तीफे की खबरें सामने आईं, हालांकि बाद में बातचीत के बाद स्थिति नियंत्रित होती दिखी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
आगे क्या?
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क्या केंद्र सरकार या कोई केंद्रीय एजेंसी औपचारिक जांच शुरू करेगी?
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क्या मानहानि का मुकदमा अदालत में लंबी कानूनी लड़ाई का रूप लेगा?
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क्या यह विवाद चुनावी नैरेटिव को प्रभावित करेगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में साफ होंगे, लेकिन फिलहाल असम की राजनीति में तापमान काफी ऊंचा बना हुआ है।
