लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
विजय कपूर की रिपोर्ट
बीकानेर । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा अलवर जिला, उपखंड मालाखेड़ा के पृथ्वीपूरा तथा हरिपूरा गाँवों में दिनांक 22.03.2025 को एक कृषक वैज्ञानिक संगोष्ठी, पशु स्वास्थ्य शिविर और नस्ल संरक्षण जागरूकता शिविर गतिविधियां आयोजित की गई । एनआरसीसी की पशु आनुवंशिक संसाधनों पर नेटवर्क परियोजना के तहत आयोजित इन विशेष गतिविधियों में 150 से अधिक पशु पालकों ने भाग लिया जिनमें महिला पशु पालकों की उत्साही सहभागिता देखी गई । इन अवसरों पर पशु पालकों को दाना, खनिज मिश्रण और दवाइयां वितरित की गई तथा पशुओं के उपचार के साथ-2 उनमें पाए जाने वाले रोगों की रोकथाम और बचाव संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई । केंद्र के निदेशक डॉ. समर कुमार घोरई के मार्गदर्शन में फील्ड स्तर पर आयोजित नेटवर्क परियोजना संबंधी गतिविधियों के बारे में उन्होंने कहा कि एनआरसीसी अपनी अनुसंधान उपलब्धियों का लाभ पशुपालकों के द्वार तक पहुंचाना चाहता है ताकि उष्ट्र स्वास्थ्य व उत्पादन, उष्ट्र अनुसंधान एवं विकास संबंधी मौजूदा अधिदेशों की दिशा में आगे बढ़ सकें । निदेशक ने केन्द्र वैज्ञानिक दल के माध्यम से अपनी बात पहुंचाते हुए कहा कि भारत सरकार की इस महत्वपूर्ण नेटवर्क परियोजना का अधिकाधिक लाभ पशुपालकों को उठाना चाहिए ।
केन्द्र की नेटवर्क परियोजना के प्रभारी डॉ.वेद प्रकाश ने पशुपालकों को एनआरसीसी द्वारा ऊँटों के संवर्धन और संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों तथा अनुसंधान गतिविधियों के बारे में विस्तृत में जानकारी दीं । डॉ.वेद प्रकाश पशुओं के बेहतर रखरखाव एवं प्रबंधन के लिए विशेषकर जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़ने की बात कहीं ताकि पशुपालन व्यवसाय को और अधिक फायदेमंद बनाया जा सकें । इस दौरान केन्द्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बसंती ज्योत्सना ने ऊँट पालकों को स्वच्छ दूध उत्पादन तथा इसे बढ़ावा देने, थनैला रोग के लक्षण तथा इस रोग से बचाव संबंधी जानकारी देते हुए ऊँटनी के दूध के औषधीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एनआरसीसी के वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि ऊंटनी का दूध मधुमेह, बच्चों में ऑटिज्म, ट्यूबरक्लोसिस आदि बीमारियों में भी लाभकारी है । सरपंच तुलसी दास नवालिया और पूर्व सरपंच इन्दर मीना ने पशुपालकों हेतु क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों के लिए एनआरसीसी के प्रति आभार व्यक्त किया तथा आशा जताई कि प्रदत्त वैज्ञानिक जानकारी से पशुपालकों को उनके व्यवसाय में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकेगी । केन्द्र के गजानंद और हरजिंदर ने ऊँटों के स्वास्थ्य, पशुओं के उपचार आदि कार्यों में सहयाता प्रदान की वहीं परियोजना से जुड़े नरेश राईका ने कार्यक्रमों का संचालन किया।