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एन.आर.सी.सी. में विश्‍व पर्यावरण दिवस पर कार्यशाला आयोजित

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

बीकानेर से विजय कपूर की रिपोर्ट
बीकानेर । भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र (एन.आर.सी.सी.), बीकानेर द्वारा विश्‍व पर्यावरण दिवस-2025’ के उपलक्ष्‍य में आज दिनांक को ‘पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी’ विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस अवसर पर पौधारोपण तथा केन्‍द्र की दो विस्‍तार पत्रिकाओं ‘जलवायु चुनौतियों के बीच सतत दुग्‍ध उत्‍पादन की संभावनाएं’ एवं ‘हार्नेंसिंग कैमल रेजीलियंस एण्‍ड डेयरी पोटेंशियल एमिड क्‍लाइमेट चेंज’ का भी विमोचन किया गया।
कार्यशाला कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता श्याम सुन्दर ज्याणी, सह-आचार्य, राजकीय डूँगर महाविद्यालय, बीकानेर ने विषयवस्तु पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी होगी। इसके लिए आवश्यक है कि हम पेड़ों को “परिवार का हरित सदस्य” मानें, ताकि भावी पीढ़ियों में पर्यावरण-मैत्री भावना का विकास हो सके। उन्होंने पर्यावरणीय असंतुलन के दुष्परिणामों जैसे जलवायु परिवर्तन, विशेषतः वैश्विक तापवृद्धि, जैव विविधता का क्षय तथा माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की रक्षा और पुनर्स्थापन अत्यंत आवश्यक और प्रासंगिक हो गया है। अंततः उन्होंने बल दिया कि हमें प्रकृति संरक्षण को केवल कर्म-पूजा के विचार से नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवनशैली का अंग बनाना होगा।
भाकृअनुप–राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र(एन.आर.सी.सी.) के निदेशक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने पर्यावरण दिवस की विषयवस्तु का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान एक साथ वरदान भी है और अभिशाप भी, क्योंकि विकास की प्रक्रिया के साथ विनाश की संभावना भी जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वविवेक से यह निर्णय करना होगा कि वह विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा या विनाश की ओर। डॉ. पूनिया ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटे-से-छोटे पहलुओं को भी गंभीरता से लेना आवश्यक है। यद्यपि प्रकृति स्वयं को पुनः संवारने की क्षमता रखती है, परंतु यह भी विचार करना चाहिए कि हमने प्रकृति का जितना दोहन किया है, उसकी भरपाई हम किस हद तक कर पा रहे हैं।कार्यशाला के चर्चा सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने पर्यावरण से संबंधित सामयिक जिज्ञासाएँ अतिथि वक्ता के समक्ष रखीं, जिनका संतोषजनक समाधान प्रस्तुत किया गया। इस दौरान केन्‍द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. समर कुमार घोरुई एवं वरिष्‍ठ प्रशासनिक अधिकारी अखिल ठुकराल ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम समन्‍वयक डॉ. विश्व रंजन उपाध्याय ने विश्‍व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला के उद्देश्य एवं महत्त्व पर प्रकाश डाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रियंका गौतम, वैज्ञानिक द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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