लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
पादूकलां । गांव के पास बनी बावड़ी इन दिनों मोरों का सुरक्षित ठिकाना बन गई है। बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में मोर यहां डेरा डाले हुए हैं। सुबह से शाम तक उनकी आवाजें गूंजती हैं। खुले आसमान में उड़ने की बजाय वे गांव के पास रहना पसंद कर रहे हैं। बावड़ी के पास चुगा-पानी के लिए मोरों के झुंड एक साथ दिखाई देते हैं। यह दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। नर मोर अपने रंगीन और चमकदार पंखों के कारण खासे सुंदर लगते हैं। उनके पंखों पर आंखों जैसे निशान होते हैं, जिन्हें मोरपंखी कहा जाता है। ये निशान रोशनी को परावर्तित करते हैं, जिससे पंख और भी आकर्षक दिखते हैं।
कुछ दिन पहले चार से पांच मोरों की मौत हो गई थी। हादसों के कारण उनकी संख्या में गिरावट आई थी। गांव के आसपास कुत्तों और बंदरों का आतंक है। इस वजह से मोर खुले में विचरण नहीं कर पा रहे थे। अब बावड़ी उनके लिए सुरक्षित स्थान बन गई है। यहां वे बिना डर के रह पा रहे हैं। ग्रामीणों को भी अब मोरों की मौजूदगी का अहसास हो रहा है।
