लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
250 वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन
चप्पे-चप्पे पर पुलिस व्यवस्था रही मुस्तैद
भुसावर। रंगों का पर्व होली कस्बे सहित उपखंड क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में प्रेम, सौहार्द और आपसी भाईचारे के साथ धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही बच्चे और युवाओं की टोलियां रंग और गुलाल में सराबोर नजर आईं। सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और फागोत्सव की मस्ती में झूमते दिखाई दिए।
त्योहार के मद्देनजर कस्बे में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा और असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखी गई।
अनोखी परंपरा: बिना दुल्हन की बारात
कस्बे में मंगलवार को लगभग 250 वर्षों से चली आ रही अनूठी परंपरा का निर्वहन किया गया। एक युवक को खिरकारी भगतराज से ‘होली का दुल्हा’ बनाकर ऊंट पर बैठाया गया और बैण्ड-बाजों के साथ कस्बे के विभिन्न मार्गों से बारात निकाली गई। यह परंपरा पिछले ढाई सौ वर्षों से निरंतर जारी है।
बारात में शामिल लोग रंग-बिरंगे चेहरे लिए, हाथों में गुलाल-अबीर उड़ाते हुए बैण्ड की धुन पर नृत्य करते और जयघोष लगाते आगे बढ़ रहे थे। कस्बेवासियों ने घरों की छतों से गुलाल और रंग बरसाकर इस अनोखी बारात का स्वागत किया।
जैन मंदिर प्रांगण में हुई रस्म
यह अनोखी होली बारात कस्बे की जैन गली स्थित जैन मंदिर भुसावर प्रांगण पहुंची, जहां ‘होली के दुल्हा’ बने युवक ने तोरण मारकर रस्म अदा की। इसके बाद शगुन के तौर पर प्रतीकात्मक रूप से उसकी पदवेशों (जूते-चप्पलों) से हल्की-फुल्की पिटाई की गई और अगले वर्ष पुनः मिलने का संकल्प लेकर सभी अपने-अपने घर लौट गए।
गंधर्व की जगह अब ऊंट
कस्बे के बुजुर्गों — कुंजबिहारी शर्मा, टिल्लाराम पंजाबी, पंडित राघवेन्द्र शर्मा और कपिल शर्मा — ने बताया कि पहले होली के दुल्हे को गंधर्व (विशेष सजे-धजे वाहन/घोड़े) पर बैठाकर जैन मंदिर लाया जाता था, लेकिन अब उसकी उपलब्धता नहीं होने से ऊंट पर बैठाकर लाने की परंपरा निभाई जा रही है।
लोकमान्यता के अनुसार जिस युवक के विवाह में किसी प्रकार की अड़चन आ रही हो या जिसकी शादी तय नहीं हो पा रही हो, उसे सर्वसम्मति से ‘होली का दुल्हा’ बनाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से उसकी शादी अगले वर्ष तक तय हो जाती है।
भुसावर की यह अनोखी होली परंपरा क्षेत्र में आज भी आस्था और उत्साह के साथ निभाई जा रही है, जो सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की मिसाल पेश करती है।

















































