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भीलवाड़ा में पहली बार शेखावटी के मशहूर गायक संजय बिरख ने दी दिलकश प्रस्तुति

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

मरूधरा माहेश्वरी संस्थान के फाग महोत्सव में दिखी राजस्थानी संस्कृति की झलक

मस्तीभरे माहौल में छाए होली के रंग, चंग की थाप पर फाग की धमाल

भीलवाडा। (पंकज पोरवाल) फागोत्सव में इससे बेहतर नजारा क्या हो सकता था कि मेवाड़ी धरा पर एतिहासिक, सामाजिक विरासत व गौरवमय संस्कृति की झलक ने लोगों का मन जीत लिया। चंग की थाप पर धमाल के साथ मस्ती भरे होली के रंग लोगों को झूमने के लिए मजबूर करते रहे। ये नजारा बुधवार रात शहर के हरणी महादेव रोड स्थित रामेश्वरम में मरूधरा माहेश्वरी संस्थान, मरूधरा माहेश्वरी महिला मण्डल एवं मरूधरा माहेश्वरी युवा मंच के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय होली स्नेह मिलन के तहत मुख्य समारोह में दिखा। शाम ढलने के बाद से शुरू कार्यक्रम रात करीब 10 बजे तक चला। आयोजन में पहली बार भीलवाड़ा पधारे राजस्थान के सुप्रसिद्ध लोकगायक राष्ट्रीय कलाकार मुकुंदगढ़ के संजय बिरख एवं उनकी 15 सदस्यीय टीम ने भीलवाड़ा शहर में चंग पर धमाल व होली के राजस्थानी गीतों पर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर गौरवशाली राजस्थानी परम्परा व संस्कृति की एक झलक प्रस्तुत की। युवा पीढी को अपनी संस्कृति के साथ जोड़े रखने एवं राजस्थानी गौरवमय परम्पराओं से अवगत कराने के उद्ेश्य से आयोजित फाग महोत्सव में महिलाएं पारंपरिक पोशाक तथा पुरूषा सिर पर जोधपुरी साफे के साथ सफेद पोशाक धारण किए हुए थे। रामेश्वरम में तैयार विशाल मंच पर आयोजन के विशेष आकर्षण के रूप में बांसुरी, नगाड़े के साथ चंग बजाने के दिलकश अंदाज पर भक्त खुद को थिरकने से नहीं रोक पाई। गणपति वंदना व शिव वंदना के साथ प्रस्तुतियों का दौर शुरू हुआ तो बिरख ने वो महाराणा प्रताप कठ गीत के माध्यम से मेवाड़ के त्याग एवं गौरव का गाथा सुनाई। उन्होंने खाटूश्याम की स्तुति में भी गीत सुनाया। शहनाई की मधुर ध्वनि एवं चंग की थाप पर एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों के दौरान कई महिला-पुरूष जमकर झूम उठे। बिरख ने अपनी टीम के साथ खुशनुमा माहौल में हास्य,व्यंग्य,फाग व राजस्थानी गीतों पर चंग व बांसुरी के साथ मनभावन प्रस्तुतियां देकर लोगों का दिल तो जीता ही साथ ही उन्हें अपने साथ थिरकने के लिए भी मजबूर कर दिया। बच्चें हो या बुर्जुग, महिलाएं हो या युवतियां सभी फाग महोत्सव में मस्तीभरे आनंद रस से सराबोर दिखे। इस दौरान मीठे बोल रे पपीहा, खड़ी नीम के नीचे एकली, पान को टुकड़ों, म्हाने आवे हिचकी, धरती गोरा री, म्हारो गोरबंद नखरालो, पल्लो लटके गौरी को, नखरालो देवरियों, बालम छोटो सो, चांद चढयो गिरनार,मोरयो आच्छो बोल्यो आधी रात में, रितु आई फाल्गुन की आदि मनभावन गीतों की आकर्षक प्रस्तुतियों पर दर्शक थिरकते रहे। बरख की टीम को महिला कलाकारों ने मटका नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी तो पांडाल तालियों की करतल ध्वनि से गूंज उठा। महोत्सव में कई कलाकार शेखावटी की पारम्परिक पोशाक में चंग बजा रहे थे। कुछ कलाकार बांसुरी,नगाड़ा,पेड़, पियानो व ढोलक बजा रहे थे तो कोई कलाकार धमाल,फाग, मारवाड़ी व राजस्थानी गीतों की प्रस्तुति दे रहे थे। कुछ कलाकार इन प्रस्तुतियों पर नृत्य भी कर रहे थे। कार्यक्रम में शुरू में दीप प्रज्वलन मरूधरा माहेश्वरी संस्थान के अध्यक्ष शांतिप्रकाश मोहता, श्याम चाण्डक, राधा किशन सोमानी, कैलाश तापड़िया, राधेश्याम सोमानी, सत्यनारायण नंदू झंवर आदि ने किया। विशिष्ट अतिथि श्रीगोपाल राठी, राधेश्याम चेचानी, कैलाश कोठारी, ओम नराणीवाल, एलएन डाड, अशोक बाहेती आदि थे। संस्थान के दामोदर सिंगी, प्रकाश झंवर, मुरारीलाल बियाणी, हेमराज नंदलाल बजाज, किशन झंवर, श्रीवल्लभ चांडक, हरीश कांकनी, कमल मोहता के साथ मरूधरा माहेश्वरी महिला मण्डल अध्यक्ष शीतल चांडक, महासचिव संगीता बाहेती आदि ने पूरे उत्साह के साथ आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई। आयोजन की व्यवस्था में संस्थान के कैलाश तापड़िया, राजेश बाहेती, अनिल मूंदड़ा, मधुसूदन डागा आदि का विशेष सहयोग मिला। आयोजन सफल बनाने पर अध्यक्ष शांतिप्रकाश मोहता ने आभार जताया। इस आयोजन में माहेश्वरी समाज की नगर व जिला सभा के साथ ही क्षेत्रीय सभाओं के पदाधिकारियों ने भी शिरकत की।

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