लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
गहलोत का शगुफा है या फिर दाल में कुछ काला
जयपुर । राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत में आज मीडिया कर्मियों को एक सवाल के जवाब में कहा कि राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को बदलने की कवायद चल रही है । राजस्थान के नेता राजस्थान और दिल्ली में इस कवायत में जुटे हैं लेकिन मुख्यमंत्री जी को जानकारी नहीं है ।
मुख्यमंत्री जी ने जवाब देकर बहुत सास का काम किया है लेकिन वह काम करें तो अच्छा लगेगा
एक अन्य सवाल के जवाब में गहलोत ने कहा कि ये हिम्मत की बात है मुख्यमंत्री के लिए बहुत साहस किया है उन्होंने ये कहने का पांच साल कांग्रेस शासन से ज्यादा काम मैंने डेढ़ साल में ही कर दिया। अब पूरा प्रदेश जानता है कि हमारी दुर्गति कैसी हो रही, कोई सुनवाई करने वाला नहीं और ये नहीं कि सुनवाई अगर नहीं हो रही है तो शिकायत किससे करें ? वो भी नहीं है इनको पता। ये भी नहीं पता है। कोई काम हो नहीं रहे हैं, जो हमारी स्कीमें थीं शानदार, बीमा की स्वास्थ्य की हो, पेंशन चार – चार महीने मिलती नहीं है, नरेगा का गरीब मजदूर है उनको चार – चार पांच – पांच महीने तनख्वाह नहीं मिलती है मजदूरी नहीं मिलती है बाकी पानी बिजली अब तो बरसात आ गई है वर्ना क्या स्थिति बनी थी गर्मियों के अंदर बिजली कटौती कितनी हुई थी, गर्मी में हमनें आगाह किया पानी की समस्या आएगी, तो इनको कोई सरोकार ही नहीं है इन बातों से ,अब मैं बार बार मुख्यमंत्री को कहना चाहूंगा, हम विपक्ष में हैं जनभावना जो होती है या हमारे पास में जो लोग आकर कहते हैं या मीडिया में कोई खबर आती है,उसके आधार पर हम लोग बात उठाते हैं, वो समझते हैं राजनीतिक आलोचनाएं, चर्चा ही नहीं हैं,इस भ्रम में रहेंगे मुख्यमंत्री जी तो तकलीफ मुख्यमंत्री जी को होने वाली है, अभी तो इनके खिलाफ में इनके पार्टी के लोग लग चुके हैं दिल्ली में भी और राजस्थान के अंदर भी,भयंकर षडयंत्र चल रहा है, इनको हटाने का ये समझ नहीं पा रहे हैं।
नौजवान को मौका मिला है उनका काम करने दिया जाए मेंटेन रखना उनके हाथ में
हम बार बार इनको समझा रहे हैं कि भई नया नया एक नौजवान को चांस मिला है पहली बार एमएलए बने मुख्यमंत्री बन जाएं कितनी बड़ी बात है ,इनको मेंटेन रखें ये, बार बार बदलने का क्या फायदा ? तो ये हम तो इनके इंटरेस्ट में बता रहे हैं कि प्रदेश के अंदर जो हालात हैं वो बहुत गंभीर हैं, जनता त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है,अब अगर इनके पास ये जनसुनवाई करने लग जाएं तो मालूम पड़े जनता वास्तव में क्या चाहती है। कार्यकर्ताओं को अपने घर में बैठाकर अलग से बात करें, कि भई वास्तव में क्या स्थिति है राजस्थान में तो वो खुल के बताएगा। अब जो इनके चारों ओर जो घेरा बना लिया है इन्होंने वो इनकी तारीफों के पुल बांध रहा होगा अच्छी सरकार चल रही है तो इनको समझ में आ नहीं रही है। हम आलोचना करते हैं वो हमारी आलोचना खाली फीडबैक के आधार पर है, अभी तो साल डेढ़ साल हुआ है हम क्या राजनीतिक आलोचना करेंगे ? क्या आरोप लगाएंगे इनके ऊपर ? और लगाना चाहते भी नहीं हम लोग। हम तो खाली जनता के बीच जो आती समस्याएं, जनता कहती है कुछ नहीं हो रहा है, आप की स्कीमें बंद हो गई हैं वो हम लोग खाली इनके सामने रखते हैं ये मेरा कहना है।
