लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
झालावाड़, (गंगधार)। गंगधार तहसील क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खरीफ की फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। लगातार दक्षिण-पश्चिमी हवाएं चलने से खेतों की नमी भी समाप्त हो रही है, जिससे किसान गहरी चिंता में हैं।
बारिश की कमी से बढ़ी चिंता
इस बार मानसून सीजन (1 जून से 15 अगस्त) के दौरान गंगधार क्षेत्र में केवल करीब 13 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में सबसे कम है।
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बरसात थमने से खेतों की नमी समाप्त हो गई है।
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खरीफ फसलों की वृद्धि रुक गई है।
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कीट प्रकोप भी बढ़ने लगा है।
सोयाबीन की फसल पर सबसे ज्यादा असर
किसानों ने इस बार बंपर मात्रा में सोयाबीन की बुआई की थी। शुरुआती दौर की बारिश से फसलें अच्छी तरह बढ़ीं और किसानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद जगी थी। लेकिन अब लगातार बारिश न होने से:
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फसलें मुरझाने लगी हैं।
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कई खेतों में फूल और फलिया बनने की प्रक्रिया थम गई है।
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मक्का और ज्वार की फसलें भी प्रभावित हो रही हैं।

किसानों की आर्थिक स्थिति पर संकट
स्थानीय किसान सोनू दुबे का कहना है कि बारिश की कमी से खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं। उन्होंने कहा:
“शुरुआत में बारिश से उम्मीदें जगी थीं, लेकिन अब फसलें सूखने लगी हैं। अगर जल्दी बारिश नहीं हुई तो हमें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।”
अनुभवी किसानों का मानना है कि यदि बारिश समय पर नहीं हुई तो न केवल खरीफ फसलें प्रभावित होंगी बल्कि रबी सीजन की गेहूं, चना और धनिया जैसी फसलों की बुवाई भी प्रभावित होगी।
पशुपालन पर भी संकट
खेती के साथ-साथ किसानों के पास पशुपालन ही आजीविका का दूसरा जरिया है। लेकिन बारिश न होने से चारा बर्बाद हो रहा है। ऐसी स्थिति में मवेशी पालना भी मुश्किल हो सकता है और किसानों को उन्हें बेचने तक की नौबत आ सकती है।
किसानों की आसमान की ओर नजर
बरसात की कमी से क्षेत्र के किसानों की चिंता गहरी हो गई है। अब पूरा किसान वर्ग अच्छी बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहा है, ताकि उनकी मेहनत और आजीविका पर संकट टल सके।










































