ऑस्ट्रेलिया में देवी देवताओं का अपमान, हनुमान जी के नाम से बिक रही है बीयर और शराब

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हेमराज तिवारी वरिष्ठ पत्रकार -लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

कॉर्पोरेट मुनाफे की ठंडी चाल — ऑस्ट्रेलिया में बिकती ‘Cold Hanuman’ शराब”

सांस्कृतिक अस्मिता और बाज़ार की नैतिकता पर सवाल

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के कुछ स्टोर्स में बिक रही एक शराब की बोतल ने भारत सहित कई हिन्दू संगठनों को झकझोर कर रख दिया है। यह शराब ब्रांड “Cold Hanuman” के नाम से बाज़ार में आई है, जिसमें भगवान हनुमान की छवि का प्रयोग एक मद्यपेय ब्रांड के तौर पर किया गया है। सवाल यह है कि क्या मुनाफे की अंधी दौड़ में कंपनियां अब धार्मिक आस्थाओं का भी बाज़ार बना लेंगी?

धार्मिक अपमान या ब्रांडिंग की चाल?

हनुमान, जिन्हें हिंदू धर्म में बजरंग बली, मर्यादा का प्रतीक, ब्रह्मचारी और शक्ति के अवतार के रूप में पूजा जाता है, उनकी छवि को शराब की बोतल पर छापना न सिर्फ़ सांस्कृतिक असंवेदनशीलता है बल्कि करोड़ों आस्थावानों के लिए सीधा अपमान है।

यह ब्रांडिंग इस बात की मिसाल है कि कैसे कुछ कंपनियां धार्मिक प्रतीकों का व्यावसायिक शोषण कर रही हैं, बिना यह सोचे कि इससे समाज के बड़े हिस्से की भावनाएं आहत होती हैं।

क्या ऑस्ट्रेलिया में इस पर रोक संभव है?

ऑस्ट्रेलिया एक मल्टीकल्चरल देश है, जहां अनेक संस्कृतियां और धर्म एक साथ सह-अस्तित्व में हैं। फिर भी, इस तरह के उत्पाद अगर स्टोर्स में खुलेआम बिक रहे हैं, तो यह वहां की नैतिक निगरानी प्रणालियों की विफलता को दर्शाता है।

भारतीय समुदाय के लोग और धार्मिक संगठन अगर आवाज़ उठाएं, तो एथिकल रिव्यू बोर्ड्स या ऑस्ट्रेलियन एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स ब्यूरो जैसे संस्थानों से कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती है।

यह सिर्फ एक ब्रांड नहीं, एक प्रवृत्ति है:

Cold Hanuman’ शराब की ब्रांडिंग उस वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा है जहाँ “Cultural Appropriation” यानी “संस्कृति की चुराई गई नक़ल” को उत्पादों में बेचने का साधन बना लिया गया है। पहले योगा को फैशन बना दिया गया, फिर गणेश की तस्वीरों को जूतों और अंडरगारमेंट्स पर छापा गया, और अब हनुमान को शराब की बोतल पर बेचने की बारी है।

Cold Hanuman” ब्रांड न सिर्फ़ धार्मिक आस्था पर चोट है, बल्कि यह वैश्विक बाज़ार की उस ठंडी और निर्मम मानसिकता का परिचायक भी है जहाँ भावनाओं की कोई कीमत नहीं, बस बिकने की क्षमता मायने रखती है।

समाज को अब यह तय करना है कि क्या वह मुनाफे के नाम पर अपनी आस्थाएं और प्रतीक बेचने देगा, या इसके ख़िलाफ़ संगठित होकर नैतिक सीमा की पुनर्स्थापना करेगा।

इस तरह की धार्मिक भावनाएं  भड़काने का कृत्य यदि इस्लाम को लेकर किया गया होता तो अब तक पूरे देश में नहीं पूरे विश्व में बवाल मत चुका होता, लेकिन हिंदू धर्म के देवी देवताओं का इस तरह से मखौल उड़ाना आम बात हो गई है।  हालांकि हिंदू धार्मिक संगठनों के विरोध के बाद इस तरह के पोस्टर और ब्रांड हटा भी दिए जाते हैं। भारत सरकार भी इस मामले में  हस्तक्षेप करके भगवान जी की तस्वीर और उनका नाम इस कोल्ड हनुमान बीयर और शराब से हटवा सकती है।

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