लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
चित्तौड़गढ़, राजस्थान | आरणी (तहसील राशमी)
ग्राम पंचायत आरणी के ग्रामीण पिछले चार दिनों से अवैध अतिक्रमण के खिलाफ भूख-हड़ताल पर बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की समाधि भूमि, चारागाह और तालाब पेटे की ज़मीन पर पूर्व सरपंच भैरूलाल सुथार व उनके साथियों ने कब्ज़ा कर लिया है।
प्रशासन से सहयोग नहीं मिलने का आरोप
ग्रामवासी राजू गिरी गोस्वामी ने बताया कि इस संबंध में बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
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15 जून व 29 जून को राजस्थान संपर्क 181 पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई गई।
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30 जून को ग्राम विकास अधिकारी, विकास अधिकारी राशमी, थाना प्रभारी राशमी, जिला कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया गया।
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5 अगस्त 2025 को डाक द्वारा भी जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा गया।
फिर भी आज तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस प्रशासन उल्टा उन्हें थाने बुलाकर डराने-धमकाने का काम कर रहा है।
खून से लिखा गया पत्र
ग्रामीणों का कहना है कि जब कलम और शब्द थक गए तो उन्हें लहू से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त करनी पड़ी।
“यह सिर्फ पत्र नहीं, बल्कि हमारे गांव की चीख है। यह लहू हमारी ज़मीन की पीड़ा है।”
सुप्रीम कोर्ट का हवाला
ग्रामीणों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार चारागाह और तालाब पेटे की भूमि पर कोई भी व्यक्ति अतिक्रमण नहीं कर सकता, इसके बावजूद कब्ज़ा हटाने की कार्रवाई नहीं हो रही।
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खसरा नं. 4635/452 (रास्ता)
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खसरा नं. 450 (रास्ता)
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खसरा नं. 4630/449 (चारागाह)
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खसरा नं. 4636/456 (तालाब पेटा)
भूख-हड़ताल पर बैठे ग्रामीण
ग्रामीणों ने 28 अगस्त से भूख-हड़ताल शुरू की है, जिसका आज चौथा दिन है।
भूख-हड़ताल पर:
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नारायण गिरी गोस्वामी
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अमित गिरी गोस्वामी
धरने पर बैठे:
मनोहर गिरी, राजू गिरी, डालू गिरी, शंभु, श्याम गिरी, संपत, महेश, सोनू सुखवाल, लक्ष्मण काना, रतन सुखवाल, शंभु, किशन सागर समेत दर्जनों ग्रामीण।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
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अवैध अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए।
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जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
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भविष्य में ऐसे अतिक्रमणों पर रोक लगाने के लिए पाबंदी लगाई जाए।