लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
हेमराज तिवारी वरिष्ठ पत्रकार
“माता-पिता सावधान हो जाएं – आपकी चुप्पी कहीं बहुत कुछ न छुपा दे!”
आज की पीढ़ी स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और इंस्टेंट मेसेजिंग ऐप्स के ज़रिए एक नई भाषा और शैली में जी रही है — जिसे हम ‘Gen Z स्लैंग’ या ‘इंटरनेट लैंग्वेज’ कह सकते हैं। लेकिन इस भाषा के पीछे एक खामोश सांस्कृतिक संकट जन्म ले चुका है।
यदि आपका बच्चा आपसे यह कहे — “मेरा बॉडी काउंट 2 है” — तो यह कोई गणितीय या खेलकूद की गिनती नहीं, बल्कि उसके यौन संबंधों की संख्या का संकेत हो सकता है। और यही वह बिंदु है जहाँ माता-पिता को आंखें खोलने की ज़रूरत है।
“बॉडी काउंट” का अर्थ क्या है?
पश्चिमी देशों की पॉप कल्चर और स्लैंग में “Body Count” का अर्थ होता है:
“अब तक कितने लोगों के साथ वह व्यक्ति यौन संबंध बना चुका है।”
यह शब्द अब भारतीय युवाओं की ज़ुबान पर भी आ चुका है — इंस्टाग्राम स्टोरीज़, चैटिंग ऐप्स, मेम्स और रिल्स के जरिए। अधिकतर माता-पिता इसकी गंभीरता से अनजान रहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह कोई सामान्य शब्द है।
संस्कृति पर हमला है, अभिव्यक्ति नहीं
भारत एक ऐसा देश है जहाँ संबंधों में मर्यादा, प्रेम में पवित्रता और शरीर में आत्मा की उपस्थिति को महत्व दिया जाता है। लेकिन पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण में आज का युवा:
रिश्तों को “यूज़ एंड थ्रो” मानने लगा है।
शारीरिक संबंध को statistical achievement या “coolness quotient” के रूप में देखने लगा है।
और माता-पिता से संवाद लगभग शून्य हो चुका है।
माता-पिता को क्या करना चाहिए?
संवाद बहाल करें — बच्चों से बात करें, डाँटने के बजाय समझें।
उनकी भाषा को समझें — यह जानने का प्रयास करें कि वे क्या देख रहे हैं, सुन रहे हैं, और किससे प्रभावित हो रहे हैं।
संस्कारों का बीजारोपण करें — भारतीय मूल्यों, धार्मिक समझ, आत्मानुशासन और सीमाओं का सम्मान कराना सिखाएँ।
डिजिटल शिक्षा दें — उन्हें इंटरनेट की ताकत और उसके खतरों दोनों से परिचित कराएँ।
Gen Z की ‘Cool’ संस्कृति में क्या छिपा है?
शब्द अर्थ खतरा
Body Count अब तक के यौन संबंधों की संख्या यौन व्यवहार को खेल बनाना
Sneaky Link गुप्त संबंध/one-night stand छिपे यौन व्यवहार की स्वीकृति
Hookup बिना भावनात्मक जुड़ाव के संबंध रिश्तों की संवेदनहीनता
WAP (slang) Highly sexual expression अश्लीलता का सामान्यीकरण
मीडिया और मनोरंजन की भूमिका
OTT प्लेटफ़ॉर्म, वेब सीरीज़, म्यूज़िक वीडियोज़ और रील्स — आज के मनोरंजन माध्यमों में ऐसी भाषा और विचारधारा का बोलबाला है जहाँ:
शरीर प्रमुख वस्तु है आत्मा और भावनाएँ पीछे छूट गई हैं और नैतिकता “ओल्ड फैशन” घोषित कर दी गई है
यह सब मिलकर एक मौन सांस्कृतिक आक्रमण का निर्माण करता है।
“जब कोई बच्चा यह बोले कि ‘मेरा बॉडी काउंट 3 है‘, तब माता-पिता को डरने की नहीं, जागने की ज़रूरत है।”
“संस्कारों को उपदेश नहीं, दृष्टांत चाहिए। और बच्चों को डाँट नहीं, दिशा चाहिए।”
भारत के माता-पिता यदि अभी नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल शरीरों के आँकड़े गिनती रहेंगी — और भावनाओं, आत्मा और रिश्तों की गरिमा का शव भी शायद कोई न गिने।
भारतीयता कोई पुराना विचार नहीं, वह हमारी पहचान है। उसे बचाना आधुनिकता के विरुद्ध नहीं, उसके भीतर से निकली हुई सच्ची समझ है।
“बॉडी काउंट मत गिनो, बेटा…
अपने अंदर की आत्मा को पहचानो।”







































