लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
हेमराज तिवारी वरिष्ठ पत्रकार
आज का दिन भारत के अंतरिक्ष इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। भारतीय मूल के एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने Axiom Mission-4 के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की ओर ऐतिहासिक उड़ान भरकर न केवल विज्ञान और तकनीक की ऊँचाइयों को छुआ है, बल्कि हर भारतीय के दिल में गौरव की एक नई लौ जलाई है।
यह उड़ान आसान नहीं थी। छह बार तकनीकी दिक्कतों के कारण टला यह मिशन, आखिरकार 25 जून को फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ। शुभांशु ने जैसे ही अंतरिक्ष में कदम रखा, उनका बयान – “व्हाट ए राइड! मेरे कंधे पर लगा तिरंगा बताता है कि मैं आप सभी के साथ हूं”, हर भारतीय के मन को छू गया। इस भावुक पल ने यह साबित कर दिया कि चाहे अंतरिक्ष की कितनी भी दूरियां क्यों न हों, दिल हमेशा देश के साथ होता है।
शुभांशु की यह सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं है, यह भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य, वैश्विक सहयोग, और नवाचार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस मिशन में नासा, स्पेसएक्स और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अब वैश्विक अंतरिक्ष प्रयासों में एक भरोसेमंद भागीदार बन चुका है।
उनके माता-पिता की आंखों से छलकते गर्व के आंसू, भारत के हर माता-पिता की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अपने बच्चों को सपनों की उड़ान भरते देखना चाहते हैं। यह मिशन न केवल युवाओं को प्रेरित करेगा, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने की सोच को भी नया बल देगा।
आज जब भारत चंद्रयान और गगनयान जैसे मिशनों में आगे बढ़ रहा है, तब शुभांशु शुक्ला जैसे नायक हमें यह याद दिलाते हैं कि हमारे सपनों की कोई सीमा नहीं है – ना ज़मीनी और ना ही आसमानी।
यह मिशन सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, जज़्बे और जड़ों से जुड़े होने की मिसाल है। अंतरिक्ष में लहराता तिरंगा आज हर भारतीय की उम्मीदों और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया है।













































