लापता युवक की हत्या की आशंका,4 महीने बाद भी रहस्य बरकरार!

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
न्याय की गुहार लेकर आईजी दफ्तर पहुंचा बेबस पिता
भरतपुर/धौलपुर | क्राइम रिपोर्ट,  (मुनेश धाकरे) 
धौलपुर जिले के कौलारी थाना क्षेत्र से करीब चार महीने पहले लापता हुए युवक तेजपाल का मामला अब पुलिसिया सुस्ती और लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं, लेकिन चार महीने बीत जाने के बावजूद न तो मौत की पुष्टि हो सकी है और न ही दोषियों तक पुलिस पहुंच पाई है।
न्याय की आस में भटकते हुए पीड़ित पिता बहादुर सिंह बुधवार को मजबूरन भरतपुर रेंज आईजी कैलाश चंद्र बिश्नोई के कार्यालय पहुंचे और उन्हें ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा सुनाई।
सवालों के घेरे में पुलिस जांच
धौलपुर के बड़ी नगरिया गांव निवासी बहादुर सिंह का कहना है कि उनका पुत्र तेजपाल संदिग्ध हालात में लापता हुआ था, लेकिन शुरुआत से ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
परिजनों की आशंका को तब और बल मिला जब कौलारी थाना क्षेत्र के मालोनी रपट पर एक लावारिस लाश मिली।
परिवार का दावा है कि शव के पास से मिला सामान तेजपाल का ही था, बावजूद इसके पुलिस आज तक शिनाख्त की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर पाई।
FSL रिपोर्ट 3 महीने से अटकी, क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
तीन महीने पहले FSL जांच के लिए भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं आई?
क्या एक संभावित हत्या के मामले में इतनी देरी सामान्य है?
अगर समय रहते रिपोर्ट आ जाती, तो क्या सच सामने आ सकता था?
परिजनों का आरोप है कि FSL रिपोर्ट में देरी ने पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, जिससे आरोपियों को बचने का मौका मिल रहा है।
पिता की गुहार: “बेटा जिंदा नहीं, सच तो बताओ”
आईजी कार्यालय पहुंचे बहादुर सिंह ने साफ शब्दों में कहा—
“मुझे अब बेटे के जिंदा होने की उम्मीद नहीं है, बस यह जानना चाहता हूं कि उसे मारा किसने और क्यों।”
उन्होंने मांग की कि
FSL रिपोर्ट तुरंत मंगवाई जाए
मामले को हत्या मानकर जांच की जाए
दोषियों को गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाई जाए
‍♂️ आईजी का आश्वासन, लेकिन सवाल कायम
आईजी कैलाश चंद्र बिश्नोई ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हालांकि सवाल अब भी जस के तस हैं—
क्या आश्वासन के बाद भी जांच तेज होगी?
क्या चार महीने की देरी का जवाब किसी के पास है?
क्या पीड़ित परिवार को वास्तव में न्याय मिल पाएगा?
⚠️ सिस्टम पर उठता भरोसे का सवाल
यह मामला सिर्फ एक युवक की गुमशुदगी नहीं, बल्कि पुलिस जांच प्रणाली पर उठता बड़ा सवाल बनता जा रहा है।
अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद आज एक परिवार इंसाफ की भीख मांगने को मजबूर न होता।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि आईजी स्तर से दिए गए निर्देश जमीन पर कब और कैसे नजर आते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दम तोड़ देगा।
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