लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पारा गिरते ही बड़ा दल सागर व नृसिंह मंदिर तालाब बने प्रवासी पक्षियों का ठिकाना
गंगधार/झालावाड़।
झालावाड़ जिले के गंगधार क्षेत्र में तापमान गिरते ही बड़ा दल सागर तालाब और नृसिंह मंदिर छोटा तालाब फिर से प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हो गए हैं। रंग-बिरंगे पक्षियों की मौजूदगी से यह इलाका पक्षी प्रेमियों और प्रकृति के शौकीनों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।
तालाबों में दिख रहे 75 से अधिक प्रजातियों के पक्षी
जलाशयों के आसपास अनेक तरह के तोते, सारस, बतख, मुर्गाबी, जलकूकड़ी, युरेशियन कूट (जलगुर्गी), बगुले, पेंटेड स्टॉर्क, एशियन ओपनबिल (घोंघिल), किंगफिशर, पेलिकन सहित कई प्रवासी पक्षी दिखाई दे रहे हैं।
ये दोनों तालाब क्षेत्र के महत्वपूर्ण वेटलैंड माने जाते हैं, हालांकि सिंचाई के उपयोग के कारण इनमें पानी जल्दी कम हो जाता है और पक्षियों को अपना जीवन चक्र पूरा कर वापस लौटना पड़ता है।
पर्यावरण प्रेमियों की नजर में गंगधार का पक्षी संसार
पर्यावरण एवं पक्षी प्रेमी दशरथ नंदन पांडे ने बताया कि इन दिनों बड़ा दल सागर और छोटा तालाब पर करीब 75 प्रजातियों के पक्षियों ने डेरा डाला हुआ है।
उन्होंने बताया कि यहां युरेशियन कूट जैसे दुर्लभ दिखने वाले पक्षी भी मौजूद हैं।
हाल ही में मध्यप्रदेश के सीतामऊ एसडीएम शिवानी गर्ग और सीओ सीतामऊ ने भी यहां पहुंचकर पक्षी अवलोकन किया। 
प्राकृतिक प्रवास प्रक्रिया का हिस्सा
प्रधानाचार्य कुमोद शर्मा ने बताया कि प्रवास पक्षियों की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें वे भोजन, प्रजनन या अनुकूल मौसम की तलाश में हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। वे सूर्य, तारों, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्रों और गंध के आधार पर दिशा तय करते हैं।
उन्होंने बताया कि इन दिनों गंगधार के आसपास तालाबों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी दिख रहे हैं, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।











































