लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
विदेश से MBBS, भारत में FMGE में फेल… फिर 16 लाख में खरीदा फर्जी सर्टिफिकेट; करौली और दौसा मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप का पर्दाफाश
जयपुर | आर.एन. सांवरिया
जयपुर | राजस्थान एसओजी ने मेडिकल सेक्टर में फर्जीवाड़े की बड़ी साजिश का भंडाफोड़ करते हुए तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी विदेश से MBBS करने के बाद FMGE परीक्षा में असफल रहे, लेकिन ₹16 लाख में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट और NMC रजिस्ट्रेशन हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप तक करने लगे थे।
कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?
एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि अभियुक्त डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी (दौसा) FMGE परीक्षा में बार-बार फेल होने के बावजूद एक आपराधिक नेटवर्क के जरिए नकली प्रमाणपत्र तैयार करवाया।
इसी फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर उसे NMC से इंटर्नशिप की अनुमति मिल गई और राजकीय मेडिकल कॉलेज, करौली में इंटर्नशिप का आवंटन भी हो गया था।
एसओजी को मिले इनपुट की जांच में आरोप सही पाए गए और प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई।
₹16 लाख में खरीदे गए नकली दस्तावेज़
जांच में सामने आया कि:
-
डॉ. पियूष ने जॉर्जिया से MBBS किया था।
-
वह 2022, 2023 और 2024 में FMGE में लगातार असफल रहा।
-
इसके बाद उसने अपने परिचित डॉ. देवेंद्र सिंह गुर्जर से संपर्क किया।
-
देवेंद्र व उसके साथी डॉ. शुभम गुर्जर ने उसे ₹16 लाख में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट और NMC रजिस्ट्रेशन दिलवाया।
⚠️ नेटवर्क का दायरा और भी बड़ा
जांच में यह भी सामने आया कि—
-
डॉ. शुभम गुर्जर ने भी फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर राजीव गांधी अस्पताल, अलवर में इंटर्नशिप की।
-
डॉ. देवेंद्र सिंह गुर्जर ने भी इसी गिरोह के माध्यम से नकली FMGE सर्टिफिकेट बनवाकर राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा में अपनी इंटर्नशिप पूरी की।
यानी फर्जीवाड़ा संगठित नेटवर्क के जरिए बड़े स्तर पर चल रहा था।
एसओजी की कार्रवाई: नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच
एसओजी ने तीनों आरोपियों—
-
डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी
-
डॉ. शुभम गुर्जर
-
डॉ. देवेंद्र सिंह गुर्जर
—को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है और पुलिस अभिरक्षा प्राप्त की जा रही है।
अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए एसओजी निम्न बिंदुओं पर काम कर रही है:
-
फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनाने वाले मुख्य गिरोह की पहचान
-
बीच में सक्रिय बिचौलियों की भूमिका
-
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इंटर्नशिप कर चुके अन्य डॉक्टरों की खोज
एसओजी का कहना है कि मेडिकल सेक्टर की पवित्रता और आमजन की सुरक्षा से जुड़े इस अपराध में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।











































