लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
गौरवपथ संघर्ष समिति ने उठाया मुद्दा, हजारों लोगों पर पड़ सकता है प्रभाव
अजमेर। रिपोर्ट– नितिन मेहरा
पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने अजमेर के आनासागर वेटलैंड से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखते हुए गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि वेटलैंड के नाम पर आमजन के साथ अन्यायपूर्ण और अवैध कार्रवाई की जा रही है।
राठौड़ ने बताया कि 13 नवंबर 2025 को गौरवपथ संघर्ष समिति, अजमेर के सदस्यों ने उनसे मिलकर ज्ञापन सौंपा। समिति के सदस्यों ने बताया कि राजनीतिक दबाव में आनासागर झील के आसपास निवास और व्यवसाय कर रहे लोगों पर प्रशासन द्वारा भेदभावपूर्ण कार्रवाई हो रही है।
खातेदारों की निजी संपत्तियों पर अवैध सीजिंग का आरोप
राठौड़ ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि गत वर्ष गौरवपथ स्थित कई खातेदारों की निजी संपत्तियों को वेटलैंड क्षेत्र बताते हुए अवैध रूप से सीज कर दिया गया, जबकि उच्च न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने और बिना पूर्वानुमति बेदखल नहीं करने के स्पष्ट आदेश दिए थे।
उन्होंने बताया कि इस मामले में दायर अवमानना याचिका संख्या 696/2024 में हाईकोर्ट ने 1 सितंबर 2019 को सीजिंग कार्रवाई को अवैध ठहराया था। साथ ही, 18 सितंबर 2025 को प्रशासनिक अधिकारियों ने सात दिनों में संपत्तियां सीजमुक्त करने का हाईकोर्ट में अंडरटेकिंग दी, लेकिन उसकी पालना आज तक नहीं की गई।
सेवन वंडर्स ढहाने में गलत हलफनामे का आरोप
राठौड़ ने यह भी आरोप लगाया कि गौरवपथ स्थित सेवन वंडर्स को प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में गलत हलफनामा देकर तुड़वा दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के अनुसार पहले आनासागर वेटलैंड का वैज्ञानिक सीमांकन होना आवश्यक था।
उनका कहना है कि इस कार्रवाई से जनता के 20 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
बिना वैज्ञानिक प्रक्रिया के वेटलैंड का सीमांकन बदलने के आरोप
राठौड़ के अनुसार उन्हें जानकारी मिली है कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में आकर आनासागर झील के वेटलैंड की सीमाएं बिना वैज्ञानिक आधार के बार-बार बदल रहा है।
उनका आरोप है कि—
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चहेतों को बचाने और
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विरोधियों को निशाना बनाने
की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी और वेटलैंड रूल्स 2017 का स्पष्ट उल्लंघन है।
पचास- साठ हजार लोगों पर पड़ेगा असर
राठौड़ ने चेतावनी दी कि प्रशासन द्वारा तैयार ड्राफ्ट प्लान में कई आवासीय कॉलोनियाँ और व्यवसायिक प्रतिष्ठान वेटलैंड क्षेत्र में शामिल हो रहे हैं।
यदि भविष्य में इन्हें नियम के अनुसार हटाया जाएगा, तो—
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50–60 हजार लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा
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कई लोग बेघर और बेरोजगार हो जाएंगे
सीजमुक्त करने और वैज्ञानिक सीमांकन की मांग
राठौड़ ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि—
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आनासागर वेटलैंड का वैज्ञानिक एवं न्यायोचित सीमांकन कराया जाए
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जिन संपत्तियों को बिना सुनवाई सीज किया गया है, उन्हें तुरंत सीजमुक्त कराया जाए
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सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के संबंधित आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए
उन्होंने अपने पत्र के साथ इन आदेशों की महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी संलग्न की हैं।
यह मामला अजमेर में तेजी से राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है, और हजारों प्रभावित परिवार स्थिति पर सरकार की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
















































