लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
— टूटी सड़कें, बिजली संकट, भ्रष्टाचार और मुआवजा पर उठे सवाल
रिपोर्टर: मनीष पारीक | नावां ।
नावां उपखंड के ग्राम खाखड़की में आज जिला प्रशासन की जनसुनवाई आयोजित हुई, जो ग्रामीणों के लिए वर्षों से चली आ रही समस्याओं को सामने लाने का मंच बनी।
जनसुनवाई में सड़क, बिजली, पानी, भ्रष्टाचार और फसल मुआवजा जैसे गंभीर मुद्दों पर ग्रामीणों ने खुलकर आवाज़ उठाई।
जिला कलेक्टर की अनुपस्थिति से ग्रामीणों में निराशा
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जिला कलेक्टर महेंद्र खड़गावत स्वयं जनसुनवाई में पहुंचेंगे, लेकिन वे बर्ड वॉच सेंटर पर ही रुक गए। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और निराशा देखने को मिली।
कार्यक्रम में एडीएम राकेश गुप्ता, एसडीएम दिव्या सोनी, सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र चौधरी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
टूटी सड़कों पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
ग्रामीणों ने बताया कि नावां–खाखड़की मार्ग (12 किमी) पूरी तरह जर्जर हो चुका है। आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
छापरी रोड पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि ₹10 नाले बनने थे, लेकिन सिर्फ दो बनाए गए — छह माह में ही सड़क उखड़ गई।

जल जीवन मिशन में अनियमितता
ग्रामीणों ने बताया कि 2021 में ₹1250 प्रति परिवार जल कनेक्शन के लिए जमा करवाए गए थे, लेकिन अब तक किसी को कनेक्शन नहीं मिला और न ही राशि वापस की गई। ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की।
फसलों का मुआवजा अब तक अधर में
2023 और 2025 में मूंग, ग्वार और बाजरे की फसलें बर्बाद हुईं। किसानों ने कई बार ज्ञापन दिया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। किसानों ने कहा —
“अब इंतजार नहीं, हमें तुरंत मुआवजा चाहिए।”
️ सड़कों की मरम्मत और अतिक्रमण हटाने की मांग
ग्रामीणों ने खाखड़की–शाकंभरी माता रोड, सीनोदिया, सरथला, और जाजड़ा की ढाणी मार्ग की मरम्मत की मांग की। बारिश के मौसम में ये रास्ते बंद हो जाते हैं, जिससे किसानों को खेतों तक पहुंचने में दिक्कत होती है।
नमक और खारे पानी से बिगड़ी खेती
खारे पानी के कारण खेती की जमीनें बंजर होती जा रही हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अब बीज और खाद की लागत तक नहीं निकल रही। उन्होंने कृषि भूमि का कन्वर्जन कर नमक खारड़ उपयोग हेतु अनुमति देने की मांग की।
भूमि विवाद और कन्वर्जन की समस्या
गांव के लगभग 25 परिवार कृषि भूमि पर पक्के मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन भूमि आबादी क्षेत्र घोषित नहीं हुई। ऐसे में ये परिवार किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे। ग्रामीणों ने भूमि कन्वर्जन कर आबादी भूमि घोषित करने की मांग की।
⚡ बिजली कटौती से जनजीवन प्रभावित
ग्रामीणों ने कहा कि जब भी प्रशासन सांभर झील क्षेत्र में कार्रवाई करता है, गांव में 10 घंटे तक बिजली काट दी जाती है। गर्मी के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं।
ग्रामीणों ने खाखड़की में मिनी पावर हाउस स्थापित करने की मांग रखी।
पगडंडी बंद, 150 किसानों की परेशानी बढ़ी
खसरा संख्या 617 से 722 तक दर्ज पगडंडी बंद होने से 150 किसानों को खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने रास्ता खोलने और अतिक्रमण हटाने की मांग की।
ग्रामीणों का संदेश
ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से केवल आश्वासन की कहानी सुनाई जा रही है —
“अब हमें वादे नहीं, समाधान चाहिए। अगर प्रशासन नहीं सुनेगा, तो आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।”

मौजूद अधिकारी
जनसुनवाई में उपस्थित रहे —
जिला कलेक्टर महेंद्र खड़गावत, एडीएम राकेश गुप्ता, एसडीएम दिव्या सोनी, एसडीएम मकराना अंशुल सिंह, एसडीएम कुचामन विश्वामित्र मीणा, सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र चौधरी, बीसीएमएचओ डॉ. सौरभ जैन, पशु चिकित्सा डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विवेक सिंह, तहसीलदार रामेश्वर गढ़वाल, जलदाय विभाग की शांति जाखड़, तथा बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।













































