लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
जयपुर ।
अपने हक और अधिकारों को लेकर डीएनटी (घुमंतू, अर्धघुमंतू और विमुक्त जाति) समाज ने ऐतिहासिक आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने घोषणा की है कि 7 नवम्बर को पाली जिले की बालराई स्थित एनएच-62 पर विशाल चक्का जाम किया जाएगा। इस आंदोलन में करीब 2 लाख लोग अपने मवेशियों के साथ शामिल होकर सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखेंगे और सामाजिक एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे।
“अब नहीं मांगेंगे दया, लड़ेंगे अपने अधिकारों की लड़ाई”
राष्ट्रीय पशुपालक संघ के अध्यक्ष लालजी रायका, डीएनटी संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक शेरसिंह योगी आज़ाद और घुमंतू, अर्धघुमंतू एवं विमुक्त जाति परिषद राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया ने जयपुर स्थित पिंकसिटी प्रेस क्लब में बताया कि पूरे भारत में घुमंतु-विमुक्त जातियों की आबादी 20 करोड़ से अधिक है, जबकि राजस्थान में लगभग 1.23 करोड़ लोग इस समाज से आते हैं।
इनका कहना है कि आज़ादी के बाद से सभी राजनीतिक दलों ने इस समुदाय का इस्तेमाल केवल वोट बैंक के रूप में किया, लेकिन उनके मूलभूत अधिकारों — जैसे स्थायी आवास, स्वच्छ पेयजल, बिजली, आंगनबाड़ी, विद्यालय और चिकित्सालय — की अब तक अनदेखी की गई है।
छह महीने से योजनाओं का बहिष्कार
प्रतिनिधियों ने बताया कि समाज पिछले छह महीनों से सरकारी योजनाओं का बहिष्कार कर रहा है। यह आंदोलन अब राज्यव्यापी रूप ले चुका है और समुदाय अपने हक की लड़ाई को लेकर एकजुट है।
समाज की 10 प्रमुख मांगें
डीएनटी समाज ने सरकार के सामने 10 प्रमुख मांगें रखी हैं —
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जातियों की सूची में सभी विसंगतियाँ दूर की जाएं।
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सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10% आरक्षण दिया जाए।
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पंचायत व शहरी निकायों में 10 सीटें आरक्षित की जाएं।
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जहाँ समुदाय के बाड़े या आवास हैं, उन्हें नियमित कर पट्टे दिए जाएं।
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आवासहीनों को शहर में 100 वर्ग गज और गाँव में 300 वर्ग गज भूमि दी जाए।
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शिक्षा बजट का 10% हिस्सा डीएनटी समाज के लिए अलग किया जाए।
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बच्चों को राइट टू एजुकेशन में प्राथमिकता और फीस प्रतिपूर्ति दी जाए।
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महिलाओं व युवाओं को आधुनिक उद्योगों में प्रशिक्षण व रोजगार दिया जाए।
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हर साल 1000 विद्यार्थियों को विदेश शिक्षा के लिए भेजा जाए।
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डीएनटी समाज के लिए अलग मंत्रालय, वित्त निगम और लोन सुविधा बनाई जाए।
परंपरागत वेशभूषा और जीव-जंतुओं के साथ पहुंचेगा समाज
आंदोलन में शामिल लोग अपने पारंपरिक वेशभूषा और जीविकोपार्जन से जुड़े पशु-पक्षियों के साथ बालराई पहुंचेंगे। इनमें गधे, घोड़े, ऊंट, भेड़, बकरी, कुत्ते, सांप, गोहरा, बिच्छू आदि शामिल होंगे।
कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख लोग
कार्यक्रम में सांसी समाज के राष्ट्रीय चेयरमैन ज्ञान सिंह कालावत,
एडवोकेट शंकर गाड़ियां लोहार,
सुरेश चंद्र जोगी,
कुंदनमल बंजारा,
अरविंद योगी,
भीकू सिंह राइका,
लाल सिंह राइका,
एडवोकेट सोमराज पंवार,
एडवोकेट नरेंद्र पबड़ी,
और गीता बागरिया सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता व संगठन प्रमुख उपस्थित रहे।
इस अवसर पर आंदोलन से जुड़े पोस्टर का विमोचन भी किया गया।
“हम किसी दया या सहानुभूति के नहीं, अपने अधिकारों के हकदार हैं।”
— डीएनटी संघर्ष समिति के संयोजक शेरसिंह योगी आज़ाद













































