लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
भारत बना वैश्विक ‘आर्थिक महाशक्ति’, विनिर्माण से सेवा क्षेत्र तक निर्यात में रिकॉर्ड प्रगति
राजसमंद (गौतम शर्मा)।
विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने कहा कि वर्ष 2014 से 2025 तक भारत ने विनिर्माण, रक्षा, कृषि और सेवा क्षेत्र में निर्यात के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और आज देश ने वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ की है।
उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसे अभियानों ने औद्योगिक उत्पादन, नवाचार और उद्यमशीलता को नई गति दी है।
वर्ष 2014 के बाद से विनिर्माण क्षेत्र में 60% वृद्धि हुई है और वर्ष 2023-24 में भारत का विनिर्मित निर्यात लगभग ₹37,000 अरब के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।
रक्षा क्षेत्र में 34 गुना वृद्धि
विधायक माहेश्वरी ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है।
वर्ष 2014 की तुलना में रक्षा निर्यात में 34 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भारत अब वैश्विक “डिफेंस एक्सपोर्टर” के रूप में स्थापित हो चुका है।
कृषि और सेवा क्षेत्र में भी शानदार प्रदर्शन
उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र में वर्ष 2022-23 में ₹4,040 अरब रुपये से अधिक का निर्यात हुआ, जिससे किसानों की आमदनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को बल मिला।
वहीं, सेवा क्षेत्र में आईटी, व्यापारिक और वित्तीय सेवाओं के निर्यात में 14% की वृद्धि दर्ज हुई और वर्ष 2025 में यह आंकड़ा ₹8,040 अरब रुपये तक पहुंच गया। इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और सुदृढ़ हुई है।
विदेश नीति और व्यापार सुधारों का परिणाम
विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति, नए व्यापार समझौते और निवेश प्रोत्साहन नीतियां भारतीय उत्पादों एवं सेवाओं के लिए वैश्विक बाजार के विस्तार में सहायक रही हैं।
उन्होंने कहा कि “जिला को निर्यात केंद्र बनाने की पहल” और सीमा-पार व्यापार में सुगमता ने उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया है।
“आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम”
विधायक माहेश्वरी ने कहा —
“यह प्रगति प्रधानमंत्री मोदी जी की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता, विवेकपूर्ण नीतियों और राष्ट्रहित में केंद्रित नीति-निर्माण का परिणाम है। इस अभूतपूर्व निर्यात वृद्धि ने भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता भी प्रदान की है।”


















































