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भाजपा संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध — मदन राठौड़
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क, जयपुर
(रूपनारायण सांवरिया)
जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के संविधान संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। राठौड़ ने कहा कि भाजपा ने हमेशा संविधान की रक्षा की है, जबकि कांग्रेस ने बार-बार संविधान की अवहेलना की है।
राठौड़ ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार संसद पहुंचे थे, तो उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर प्रणाम किया और शपथ ग्रहण से पूर्व संविधान की प्रति को अपने मस्तक पर लगाया था। यह भाजपा की संविधान के प्रति निष्ठा और सम्मान का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को संविधान की रक्षा पर भाषण देने से पहले अपने दल के इतिहास में झांककर देखना चाहिए।
कांग्रेस का संविधान विरोधी इतिहास: शाहबानो से लेकर इमरजेंसी तक
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने कई अवसरों पर संविधान की भावना के विपरीत कार्य किए हैं। शाहबानो प्रकरण में जब सुप्रीम कोर्ट ने एक मुस्लिम महिला को न्याय दिलाया था, तब कांग्रेस सरकार ने संविधान में संशोधन कर उस निर्णय को पलट दिया — जो संविधान की आत्मा की हत्या थी।
राठौड़ ने आगे कहा कि कांग्रेस ने देश में एक या दो नहीं, बल्कि 50 से अधिक बार जनता द्वारा चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया। यह लोकतंत्र और संविधान दोनों के साथ खिलवाड़ था।
उन्होंने कहा कि 1975 की इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस ने पूरे देश में संविधान को ताक पर रख दिया था। उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई और विरोध की आवाज़ को कुचल दिया गया।
“संविधान की दुहाई देने से पहले कांग्रेस अपने काले इतिहास को याद करे”
मदन राठौड़ ने कहा कि आज जब अशोक गहलोत संविधान की दुहाई दे रहे हैं, तो उन्हें पहले अपने दल के काले इतिहास को याद करना चाहिए। जिन्होंने बार-बार संविधान को रौंदा, वे आज संविधान के रक्षक बनने का नाटक कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश संविधान के आदर्शों पर चलते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। भाजपा संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
राहुल गांधी द्वारा अध्यादेश फाड़ने की घटना याद दिलाई
राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस का संविधान के प्रति वास्तविक रवैया उस समय सामने आया, जब राहुल गांधी ने 2013 में संसद के अंदर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा लाए गए एक महत्वपूर्ण अध्यादेश को फाड़ दिया था।
यह घटना लोकतंत्र के मंदिर — संसद का अपमान थी और यह दर्शाती है कि कांग्रेस नेतृत्व के लिए संविधान, संसद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का कोई सम्मान नहीं है।















































