लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन तेज
“हम अपनी मातृभूमि नहीं खोएंगे” — ग्रामीणों का ऐलान
सिरोही।
पिण्डवाड़ा उपखंड के भारजा गांव में शुक्रवार को आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर का ग्रामीणों ने संपूर्ण बहिष्कार किया। किसी भी ग्रामीण ने शिविर में भाग नहीं लिया। ग्रामीण शिविर स्थल के सामने एकत्र होकर प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते रहे।
800 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित खनन परियोजना
जानकारी के अनुसार, जयपुर की मेसर्स कमलेश मेटा कास्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पिण्डवाड़ा क्षेत्र के भारजा, भीमाना, वाटेरा और रोहिड़ा ग्राम पंचायतों की लगभग 800.9935 हेक्टेयर भूमि पर चूना पत्थर खनन परियोजना प्रस्तावित है।
इस परियोजना का ग्रामीण करीब डेढ़ महीने से लगातार विरोध कर रहे हैं और इसे रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।
अधिकारियों के समझाने के बावजूद ग्रामीण अडिग
शिविर के दौरान उपखंड अधिकारी नरेंद्र जांगिड़ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक परियोजना रद्द नहीं होती, वे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे।
उन्होंने इस परियोजना को क्षेत्र के पर्यावरण, कृषि भूमि, जल स्रोतों और जनजीवन के लिए घातक बताया।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने शिविर प्रभारी एबीडीओ जितेन्द्र सिंह राणावत को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने मांग की कि खनन परियोजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को व्यापक जनआंदोलन में बदल दिया जाएगा।
ज्ञापन में कहा गया कि खनन से —
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पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ेगा,
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पेयजल संकट गहराएगा,
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और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
इस दौरान ग्राम पंचायत प्रशासक पुखराज प्रजापत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों की आवाज: “हम अपने बच्चों का भविष्य उजड़ते नहीं देख सकते”
गांववासियों ने कहा कि यदि यह परियोजना शुरू हुई तो हजारों किसानों की आजीविका खत्म हो जाएगी, भूजल स्तर गिर जाएगा और खेत-खलिहान उजड़ जाएंगे।
ग्रामीणों ने दृढ़ संकल्प जताते हुए कहा —
“हम अपनी मातृभूमि नहीं खोएंगे। चाहे कितनी भी कोशिशें हों, हम अपनी जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करेंगे।”
जनआंदोलन की ओर बढ़ता विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि यह अब केवल एक गांव का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि जनता की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।















































