- Advertisement -
माँ कूष्माण्डा की पूजा से सुख-समृद्धि और आरोग्य का मिलता है आशीर्वाद
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क- रितु मेहरा
जयपुर ।शारदीय नवरात्र का चौथा दिन माँ दुर्गा के कूष्माण्डा स्वरूप को समर्पित है। मान्यता है कि देवी माँ ने अपनी अलौकिक हँसी से पूरे ब्रह्माण्ड की रचना की थी, इसी कारण इन्हें कूष्माण्डा कहा जाता है। यह स्वरूप माँ दुर्गा का अत्यंत मंगलकारी और जीवनदायिनी रूप माना जाता है।
माँ कूष्माण्डा का स्वरूप
माँ कूष्माण्डा अष्टभुजा (आठ भुजाओं) वाली देवी हैं। वे कमल पर विराजमान होती हैं और हाथों में धनुष-बाण, कमल, अमृतकलश, चक्र, गदा और जपमाला धारण करती हैं। इनकी पूजा से भक्त के जीवन में ऊर्जा, आरोग्य और समृद्धि का संचार होता है।
प्रसिद्ध मंदिर
माँ कूष्माण्डा देवी मंदिर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
कूष्माण्डा शक्तिपीठ, मैहर (मध्यप्रदेश)
कूष्माण्डा मंदिर, ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
इन स्थानों पर नवरात्र के दौरान विशेष भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिलता है।
पूजा विधि
1. सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
2. माँ कूष्माण्डा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
3. दीप प्रज्वलित कर धूप, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
4. माँ को मालपुआ और भोग में दूध से बने व्यंजन विशेष प्रिय माने जाते हैं।
5. मंत्र “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः” का जाप कर माँ का ध्यान करें।
पूजा का फल
माँ कूष्माण्डा की आराधना से भक्त का स्वास्थ्य उत्तम रहता है और रोगों से मुक्ति मिलती है।
परिवार में सुख-शांति, ऐश्वर्य और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
नकारात्मक शक्तियाँ नष्ट होती हैं और जीवन में उत्साह, साहस तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
साधक के कार्यों में सफलता और परिवार में एकता बनी रहती है।
सार यह है कि चौथे नवरात्र पर माँ कूष्माण्डा की पूजा से भक्त को दीर्घायु, आरोग्य, सुख-समृद्धि और सकारात्मक जीवन का वरदान प्राप्त होता है।
- Advertisement -














































