लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
भाजपा कार्यालय में आतिशबाजी, कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न
जयपुर , रूपनारायण सांवरिया :
एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की उपराष्ट्रपति पद पर ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा प्रदेश कार्यालय में उत्सव का माहौल बन गया। आतिशबाजी, मिठाइयों का वितरण और कार्यकर्ताओं का उल्लास छाया रहा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस जीत पर राधाकृष्णन को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और एनडीए की बढ़ती जन-स्वीकृति का प्रमाण बताया।
मदान राठौड़ ने कहा, “उपराष्ट्रपति चुनाव में हमारे उम्मीदवार राधाकृष्णन को 452 वोट प्राप्त हुए, जबकि इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। 152 वोटों के अंतर से यह विजय न केवल राजनीतिक जीत है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति और कार्यशैली में जनता और सांसदों के विश्वास का संकेत है।”
उन्होंने कहा, “जब से चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी, हमें पूरा भरोसा था कि एनडीए के समर्थन से हम शानदार जीत हासिल करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और भाजपा सरकार की नीतियों ने सांसदों का विश्वास और बढ़ाया है, जिससे एनडीए से बाहर के कई सांसदों ने भी समर्थन दिया।”
राठौड़ ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हार सुनिश्चित होने पर उन्होंने ‘आत्मा की आवाज़’ का सहारा लिया। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा, “यह वही तरीका है जो वर्ष 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनाया था, जब उन्होंने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ वी.वी. गिरी को खड़ा किया और ‘आत्मा की आवाज़’ पर वोट देने की अपील की थी। तब भी वही परिणाम सामने आया था।”
उन्होंने आगे कहा, “इस बार भी कांग्रेस ने वही तरीका अपनाया, परंतु जिनकी आत्मा जागी, उन्होंने एनडीए के उम्मीदवार को समर्थन देकर देशहित को प्राथमिकता दी।”
मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए राठौड़ ने कहा, “निष्पक्ष और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग ने लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है। यह जीत किसी एक दल की नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और देश की जनता की जीत है। यह सांसदों की विवेकशीलता और लोकतांत्रिक परिपक्वता का प्रतीक है।”
राठौड़ ने उन सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, “यह जीत भारत को स्थायित्व, प्रगति और लोकतांत्रिक मजबूती की दिशा में आगे ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।”












































