लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर । राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत में एक्स पर ट्वीट कर कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पहले भारत के चुनाव आयोग की साख इतनी मजबूत थी कि दूसरे देश अपने यहां चुनाव करवाने के लिए भारत के चुनाव आयोग से प्रशिक्षण लेते थे। आज भारत की जनता ही चुनाव आयोग को शक की निगाह से देख रही है। भारतीय जनता पार्टी के अलोकतांत्रिक कृत्यों ने भारत के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों का भी सत्यानाश कर दिया है।
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण देने की बजाय गलत बयानी करवाना दुर्भाग्यपूर्ण
गहलोत ने कहा कि आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग की भाजपा के पक्ष में #VoteChori पकड़े जाने के बाद से केन्द्रीय चुनाव आयोग स्पष्टीकरण देने की बजाय राज्य स्तरीय चुनाव आयोगों से ऐसे जवाब दिलवा रहा है जिससे इस संस्था पर जनता का विश्वास और कमजोर होगा।
दरअसल चुनाव आयोग अब “चोरी और सीनाजोरी” वाली स्थिति में आ गया है। अगर चुनाव आयोग अपनी जगह सही होता तो वह श्री राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की मांग पर वोटर लिस्ट का डाटा मशीन रीडेबल फॉर्मेट जैसे एक्सेल फॉर्मेंट में उपलब्ध करवा देता। इससे जो काम करीब 6 महीने की मेहनत के बाद हो पाया वो महज कुछ मिनटों में हो जाता।
राहुल गांधी ने बाकायदा 2024 लोकसभा चुनाव से एकदम पहले जारी की गई फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख बताकर फर्जी वोटों का खुलासा किया है, जबकि उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग, कर्नाटक चुनाव आयोग आदि 2025 की वोटर लिस्ट दिखाकर इसे गलत ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। यानी ऐसा लगता है कि चुनावी फर्जीवाड़े के बाद पकड़े जाने के डर से इन फर्जी नामों को हटाया भी जाता है।
एक और बेतुकी बात चुनाव आयोग कर रहा है कि राहुल गांधी शपथ लेकर ये सारी बातें कहें। वो ये भूल रहे हैं कि राहुल गांधी एक संवैधानिक पद पर हैं और संविधान की शपथ लेकर कार्य कर रहे हैं जिसमें संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती के लिए कार्य करना निहित है।
अगर चुनाव आयोग ईमानदारी से कार्य कर रहा होता तो वह नेता प्रतिपक्ष तो क्या एक आम आदमी द्वारा भी इतनी बड़ी गलती ध्यान में लाने पर इस तरह की अनर्गल सफाई पेश करने की बजाय एक निष्पक्ष जांच शुरू करवाता और जिसने गलती की है उन पर कार्रवाई की बात करता।










































