लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाई जा रही “एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड” योजना आज देश के गरीबों के लिए भोजन की सुरक्षा की सबसे सशक्त प्रणाली बन चुकी है। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि इस योजना के तहत देश के किसी भी कोने में रहने वाला लाभार्थी अपने मूल राशन कार्ड का उपयोग कर किसी भी उचित मूल्य की दुकान (एफपीएस) से खाद्यान्न प्राप्त कर सकता है, चाहे वह अपने राज्य में हो या किसी अन्य राज्य में। यह सुविधा विशेष रूप से प्रवासी मजदूरों, श्रमिकों और कमजोर वर्गों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।
सांसद राठौड़ के सवाल के जवाब में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री निमूबेन बांभनिया ने सदन को जानकारी दी कि इस योजना में 80.56 करोड़ से अधिक लाभार्थी शामिल हैं। उन्हें बायोमैट्रिक ई-पॉइंट ऑफ सेल (ईपीओएस) मशीनों के माध्यम से प्रमाणित कर राशन दिया जा रहा है। देश के सभी 36 राज्य और संघ राज्य क्षेत्र इस योजना से 100 प्रतिशत जुड़ चुके हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा और पारदर्शिता को ऐतिहासिक बल मिला है।
हर महीने लगभग 3 करोड़ पोर्टेबिलिटी लेनदेन हो रहे हैं, जिनमें अंतर-राज्यीय और राज्य के भीतर दोनों तरह के लेनदेन शामिल हैं। यह योजना डिजिटल इंडिया और जनकल्याण का ऐसा संगम प्रस्तुत करती है, जिसने राशन के अधिकार को बाधाओं में नहीं, बल्कि अधिकार में बदल दिया है। राजस्थान सहित पूरे देश के लाखों प्रवासी मजदूरों को अब जहां रोजगार है, वहीं भोजन भी सुनिश्चित है।
मदन राठौड़ ने कहा कि “एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड” योजना न केवल आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को सशक्त कर रही है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय और डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। यह योजना वास्तव में गरीबों के लिए एक वरदान बनकर उभरी है।










































