दबाव के चलते दिया धनखड़ ने इस्तीफा, राजस्थानियों को लगा झटका- गहलोत

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गोविंद सिंह डोटासरा बोले यूज एंड थ्रो का दौर चल रहा है धनखड़ का इस्तीफा भी इसी का परिणाम-

जयपुर।  राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मैं एक बयान जारी कर उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ के इस्तीफा देने पर कहा है कि विश्वास नहीं हो रहा उन्होंने अचानक इस्तीफा पर कैसे दे दिया? यह राजस्थान के करोड़ों लोगों के लिए एक झटका है। गहलोत  ने  कहा कि मुझे लगता है उन्होंने दबाव के चलते इस्तीफा दिया है, क्योंकि कुछ दिनों पहले ही उन्होंने कार्यक्रम में कहा था कि अभी तक तो वह 2027 तक उपराष्ट्रपति रहेंगे।  लेकिन विश्वास नहीं हो रहा कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है । उन्होंने कुछ दिनों में अपनी बात पर स्पष्ट रूप से मीडिया के माध्यम से और कार्यक्रम के बहाने कहना शुरू कर दिया था।  यह बीजेपी आलाकमान को नागवार गुजरी और अपने स्वाभिमान की रक्षा के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया, असली बात तो वही बताएंगे कि आखिरकार उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया?

दबाव में काम करने वाला व्यक्ति ही अचानक इस्तीफा  देता है अब असलियत क्या है यह तो पीएम, गृहमंत्री दो ही लोगों को पता है। अचानक स्थिति को हुआ है आरएसएस बीजेपी का कोई राजनीतिक घटनाक्रम चलाने का प्लान है क्या ?- अशोक गहलोत

अशोक गहलोत ने कहा कि मेंने जोधपुर में कहा था कि जगदीप धनखड़ और ओम बिरला दोनों दबाव में काम कर रहे हैं।  उसके बाद में धनकड़ साहब ने कहा मैं कोई जवाब में काम नहीं कर रहा हूं, कहना और बात है हकीकत होना अलग बात है और आखिरकार उन्होंने साबित कर दिया कि वह किसी दबाव में काम नहीं कर रहे हैं। पिछले दिनों ही उन्होंने कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री को भी  फटकार  दिया था  और कहा था कि पिछली बार सरकार के दौरान भी अपने किसानों से जो वादे किए थे नहीं पूरे किए अभी भी किसानों से वादे नहीं पूरे किए किसान लगातार मांग कर रहा है या तो यह स्पष्ट कर दो कि किसानों की मांग गलत है या फिर सरकार पूरी नहीं करना चाहती। उन्होंने जोधपुर में भी कहा था कि मैं किसी के दबाव में काम नहीं करता हूं और दबाव में काम करना नहीं सीखा है।

गोविंद सिंह डोटासरा

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि वहां हम दो हमारे दो के अलावा कोई नहीं चलता अगर किसी ने भी विवेक का इस्तेमाल किया या संविधान को बचाने या संविधान के अनुरूप बात की क्या विपक्ष को थोड़ी तवज्जो दिया सम्मान दिया तो उसका जाना तय है। यह जो नया ट्रेंड चला है बहुत डरावना है।

डोटासरा ने कहा कि किसान और किसान के बेटों के लिए भारतीय जनता पार्टी की सोच ही नहीं है, उनके लिए केवल उनकी नजर से वह दूर देश दुनिया को देखे वह जो कहें,, वही बात माने तो सब अच्छे य़ धनगढ़ साहब यह नहीं कर पाए सतीश पूनि का नाम लिए बगैर डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में भी ऐसा हुआ पूरे 5 साल सतीश पूनिया ने पार्टी के लिए संघर्ष किया चुनाव से पूर्व हटाया अब उपराष्ट्रपति का इस्तीफा हुआ है वह काफी नई कलाई खोलेंगे उपराष्ट्रपति का नेचर ऐसा नहीं था वह स्पष्ट वक्ता है और उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से भी अपनी बात को प्रकट करने की कोशिश की।

डोटासरा ने कहा कि ” यह ट्रेंड लोकतंत्र संविधान सबके लिए खतरा है इस मुद्दे पर प्रत्येक खुलेंगे तब सारी बातें साफ होगी यह नई बीजेपी तनक रही है जो देश के लिए डरावनी है”

डोटासरा ने कहा कि यह कोई एम्स का बुलेट नहीं है जिसमें एम्स के डॉक्टरों ने आकर क, उनका यह दर्द हैह दिया की धड़कन साहब कुर्सी पर नहीं बैठ पाएंगे ,चल फिर नहीं पाएंगे ,बोल नहीं पाएंगे ! यह उनका स्वाभिमान है की  उन्होंने अपने इस्तीफा में लिख दिया की स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं।  हमें सोचने पर मजबूर करता है।

धनखड़ साहब ने  कुछ दिन पूर्व किसी कार्यक्रम में कहा था की विपक्ष को दुश्मन नहीं समझना चाहिए।  अगर विपक्ष कुछ नहीं है और हम ही हैं, हम है,  कहें तो यह  सही नहीं है, तो यह घमंड है ,यह जो लाइन थी ,वह उनकी आत्मा से निकली हुई आवाज़ थी।  इस लाइन  ने  किसी न किसी को बेचैन कर दिया, यही लाइन धनखड़ साहब के स्तीफे के रूप में हमारे सामने आई है।  जो संविधान और भारत के लिए और लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है।

 

 

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