लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
हेमराज तिवारी वरिष्ठ पत्रकार
15 जुलाई 2025 से भारतीय रेलवे ने तत्काल रेल टिकट बुकिंग प्रणाली में एक नया और महत्वपूर्ण बदलाव लागू कर दिया है। अब IRCTC ऐप या वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग केवल आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP के माध्यम से ही संभव होगी। यह कदम एक ओर यात्रियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर नियंत्रण के इरादे से उठाया गया है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल साक्षरता और तकनीकी पहुंच की असमानता को भी सामने लाता है।
आधार आधारित प्रणाली – एक स्वागत योग्य पहल
इस नियम का उद्देश्य स्पष्ट है — टिकट दलालों पर लगाम, फर्जी बुकिंग की रोकथाम, और व्यक्तिगत पहचान आधारित पारदर्शी टिकटिंग सिस्टम की स्थापना। पिछले वर्षों में यह देखा गया है कि तत्काल टिकट बुकिंग का दुरुपयोग एक संगठित नेटवर्क द्वारा किया जाता रहा है, जिसमें सामान्य यात्रियों के लिए सीट पाना एक सपना बन गया था।
अब जब टिकट उसी मोबाइल नंबर पर OTP भेजकर बुक की जाएगी, जो यूज़र के आधार से लिंक है, तो यह बिचौलियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। यह कदम टिकट वितरण की प्रक्रिया में नैतिक अनुशासन और सत्यापन की एक नई परंपरा की शुरुआत करता है।
तकनीकी पहुँच और डिजिटल दूरी
हालाँकि यह कदम प्रशंसनीय है, पर इसके कुछ प्रैक्टिकल और सामाजिक सवाल भी हैं:
क्या भारत का हर नागरिक इतना डिजिटल रूप से सशक्त है कि वह OTP प्रणाली को आसानी से समझ और उपयोग कर सके?
क्या ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्ग यात्रियों और तकनीकी रूप से असहज वर्गों को उचित सहायता मिलेगी?
यदि किसी का मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है या OTP प्राप्त नहीं होता, तो क्या उस व्यक्ति को तत्काल टिकट नहीं मिलेगा?
इन सवालों के उत्तर नीतिगत स्पष्टता और यात्रियों को प्रशिक्षण व सहयोग देने की दिशा में होंगे।
एक संतुलन की आवश्यकता
यह अनिवार्य है कि रेलवे प्रशासन इस OTP प्रणाली को लागू करते समय कुछ लचीलापन बरते — जैसे कि रेलवे काउंटर पर OTP रहित वैकल्पिक प्रक्रिया, विशेष रूप से बुजुर्गों और विकलांग यात्रियों के लिए।
IRCTC हेल्पलाइन पर OTP संबंधित त्वरित सहायता प्रणाली।
डिजिटल साक्षरता अभियान विशेषकर ग्रामीण और कमजोर वर्ग के लिए।
“तकनीक तभी सार्थक है जब वह सबसे अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।”
आधार आधारित OTP प्रणाली से तत्काल टिकट बुकिंग में सुधार की संभावना अवश्य है, परंतु इस सुधार को सर्वसुलभ और समावेशी बनाना सरकार और रेलवे की नैतिक जिम्मेदारी है।
सुविधा के नाम पर अगर एक सामान्य नागरिक टिकट से वंचित हो जाए, तो तकनीक की सफलता अधूरी ही कही जाएगी। यह बदलाव एक अवसर भी है और एक चेतावनी भी — यदि इसे ठीक से लागू किया जाए तो यह भारतीय रेलवे की टिकटिंग प्रणाली को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।










































