लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
(निस) पादूकलां। कस्बे के पद्मावती सरोवर किनारे स्थित जीवित समाधि सूरजपुरी जी बाबोसा महाराज के मंदिर में शनिवार शाम भजन संध्या हुई। मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया। सूरजपुरी जी बाबोसा महाराज की प्रतिमा को पुष्पमालाओं से श्रृंगारित किया गया। साधु-संतों और ग्रामीणों ने विशेष पूजा-अर्चना कर भजन संध्या की शुरुआत की। सूरजपुरी जी बाबासो महाराज की प्रतिमा को विशेष रूप से सजाया गया। भजन संध्या में नागोरी और पार्टी ने भजनों की प्रस्तुति दी।
गुरु वंदना और गजानन जी महाराज के भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। पो धाम से आए संतों ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा, संतों का संग जीवन में सकारात्मकता लाता है। ऐसे धार्मिक आयोजन होते रहने चाहिए। महापुरुषों का गुणगान जरूरी है। गुरु ही अंधकार से उजाले की ओर ले जाता है। धर्म का प्रचार-प्रसार जरूरी है। मनुष्य जीवन में भगवान की आराधना होनी चाहिए। भजन संध्या में पौ धाम के महंत रामनिवास जी महाराज, रानाबाई मंदिर के महंत पांचाराम जी महाराज, जोगेश्वर धाम के महंत पर्वतनाथ जी महाराज और सियाराम धाम के महंत संतदास जी महाराज मौजूद रहे।
आयोजन समिति ने परंपरा अनुसार सभी संतों और कलाकारों का दुपट्टा और सोल ओढ़ाकर सम्मान किया।पौ धाम महंत रामनिवास जी महाराज ने कहा, यह धरती तपोभूमि है। सैकड़ों संतों ने यहां तप किया है। आज भी बुजुर्ग कहते हैं, “दादू पादु छोड़ दे, करो नरेना वास।” दादू जी महाराज ने यहीं सर्वप्रथम तप किया था। यहीं से नरेना की ओर प्रस्थान किया था। महंत रामनिवास जी महाराज ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन होते रहने चाहिए। ऐसे महापुरुषों का गुणगान जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति में गुरु का स्थान सबसे ऊंचा है।
भजन संध्या में कलाकारों ने देवी-देवताओं के भजन प्रस्तुत किए। श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। रविवार सुबह सूरजपुरी जी बाबासो महाराज की विशेष पूजा-अर्चना की गई। महाप्रसाद में रोटा, खीर, चूरमा और नारियल का भोग लगाया गया। अखंड ज्योति के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह ग्रामवासियों ने बाबा को घी शक्कर रोटा का भोग अर्पित किया। अच्छी बारिश की कामना की। श्रद्धालुओं ने कहा, बाबा के दर से कोई खाली नहीं लौटता।इसी दौरान इंद्रदेव भी प्रसन्न हुए और तेज बारिश हुई। कार्यक्रम में मंदिर पुजारी हिम्मतपुरी, पौ धाम के महंत रामनिवास जी महाराज, रानाबाई मंदिर के महंत पांचाराम जी महाराज, जोगेश्वर धाम के महंत पर्वतनाथजी महाराज, सियाराम धाम के महंत संतदास जी महाराज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामवासी मौजूद रहे।












































