लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
क्या हम मैट्रिक्स में हैं? …………
इस प्रकृति के रहस्य मनुष्य की बुद्धि से परे हैं चाहे तकनीकी अपने चरम पर ही क्यों ना चली जाये पर कुछ विषयों में विज्ञान भी प्रकृति के ज्ञान के सामने झुक जाता है। संसार में कई ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिनका रहस्य आज तक नहीं सुलझ पाया है कई संयोग ऐसे हुए जिनका उत्तर मिलना बहुत कठिन है। अभी हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार वर्ष 2025 के दिन, तारीख और वार का क्रम पूरे तरीके से वर्ष 1941 के कैलेंडर से मिल रहा है ,कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि ग्रेगोरियन कैलेंडर के काम करने के तरीके के कारण ऐसा हो रहा है।
1941 और 2025 गैर- लीप वर्ष हैं पर ये एक दुर्लभ घटना है
क्योंकि 1941 और 2025 गैर- लीप वर्ष हैं पर ये एक दुर्लभ घटना है। चलिए मान भी लिया जाये कि ऐसा हो भी सकता है पर जो घटनाएँ वर्ष 1941 में हुई थीं वैसी ही कुछ घटनाएँ अभी के वर्ष में हो रही हैं ये कोई इत्तेफ़ाक नहीं है।
1941 में द्वतीय विश्व युद्ध चल रहा था और आज के समय में भी रूस, यूक्रेन, इजराइल, गाजा व अन्य कई देश भी एक युद्ध जैसी स्थिति
जैसे 1941 में द्वतीय विश्व युद्ध चल रहा था और आज के समय में भी रूस, यूक्रेन, इजराइल, गाजा व अन्य कई देश भी एक युद्ध जैसी स्थिति में ही हैं| उस समय भी लगभग सत्तर हज़ार लोगों की हत्याएं हुईं और आज भी पहलगाम की आतंकी घटना और कई असामान्य घटनाओं में निर्दोष लोगों का मारा जाना इस बात का प्रमाण है। इन परिस्थितियों को समझ पाना बहुत ही मुश्किल है पर कुछ तो रहस्य अवश्य है।
विमान दुर्घटना हुई उसकी भविष्यवाणी एक ज्योतिषी द्वारा पहले ही हो चुकी थी
प्रकृति अपने दुर्लभ संयोगों से आखिर क्या संकेत देना चाह रही है? अभी थोड़े दिन पहले ही अहमदाबाद में जो विमान दुर्घटना हुई उसकी भविष्यवाणी एक ज्योतिषी द्वारा पहले ही हो चुकी थी और ये भी कहा गया की इस विमान दुर्घटना में किसी राजनेता की मृत्यु भी संभव है जो कि हुआ भी गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री इस विमान हादसे में मारे गए।
राजनेता की मौत और 1206 का लकी नम्बर
एक और चौंकाने वाली बात सामने आई कि ये राजनेता 1206 इस अंक को ये अपना लकी नंबर मानते थे और अपने व्यक्तिगत जीवन में इस नंबर का अधिक उपयोग करते थे उनके वाहन और अन्य साधनों का भी यही नंबर था और जिस दिन ये हादसा हुआ उस दिन की तारीख में भी 12 और 06 का अंक था। अब प्रकृति उन्हें इन अंकों के माध्यम से क्या सन्देश देना चाहती थी ये एक रहस्य ही रहेगा!
इसे क्या कहेंगे?
इस हादसे पर एक रहस्य और उजागर हुआ कि उसी दिन सुबह एक अखबार ने अपने एक विज्ञापन में एक विमान का फोटो ठीक उसी तरह प्रिंट किया जैसा विमान हादसे के बाद एक इमारत की छत से विमान का एक हिस्सा लटक रहा था और ठीक कुछ घंटो बाद वैसा ही दृश्य पूरी दुनिया ने देखा। इस विमान में 242 लोग सवार थे और उनमें से सिर्फ एक व्यक्ति रमेश विश्वास कुमार बच पाया जो की सीट नंबर 11ए पर बैठा हुआ था।
अजब संयोग
ठीक ऐसे ही थाई अभिनेता, गायक रुआंगसाक जो 1998 में थाइ एयरवेज की एक विमान दुर्घटना में जीवित बचे एक मात्र व्यक्ति थे और संयोगवश उनकी सीट भी 11ए ही थी अब इन संयोगों का उत्तर किसके पास है शायद किसी के भी पास नहीं। इसके अलावा भी कई और रहस्यमयी विषय हैं जिन पर विज्ञान का ज्ञान विफल हो चुका है ,जैसे कि इस ब्रह्मांड की सीमा कहाँ तक है? ब्लैक होल जहाँ भौतिकी का कोई नियम काम नहीं करता, मंगल ग्रह पर क्या कभी जीवन था? क्या आकाशगंगा की पूर्ण गणना संभव है? क्या पृथ्वी की तरह किसी अन्य ग्रह पर भी जीवन है? क्या एलियंस होते हैं? क्या उनका धरती पर मनुष्यों से संपर्क है? क्या उनकी तकनीकी इतनी विकसित है कि मनुष्य का उस तकनीक तक पहुँच पाना नामुनकिन है? क्या टाइम ट्रैवल संभव है?
क्या संसार के समकक्ष कोई दूसरा संसार भी विद्यमान है?
जिसे हम देख ही नहीं पा रहे हैं कुछ भविष्यकर्ता किस आधार पर भविष्यवाणी करते हैं? जो आगे जाकर एक सत्य के रूप में बदल जाती है क्या वो भविष्य देख सकते है? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि विदेश में प्रसारित एक इंग्लिश कार्टून जो कि बहुत प्रचलित है सन 1989 से टीवी पर दिखाया जा रहा है उसमें दिखाई जाने वाली अधिकतर घटनाएँ आगे जाकर सही साबित हो जाती हैं चाहे वो कोविड महामारी के बारे में हो या आगे जाकर उसके देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा? किसको नोबल प्राइज मिलने वाला है? आधुनिक तकनीकी में क्या-क्या बदलाव होंगें? सामाजिक ,राजनैतिक,धार्मिक व अन्य किसी भी क्षेत्र और उसके बारे में कब, कहाँ क्या और कैसे होने वाला है? उसका अनुमान इस शो के निर्माता को पहले से पता है और उन्हें ये जानकारी कैसे मिलती है? ये आज तक किसी को नहीं पता। अब इतने सटीक विश्लेषण को संयोग का नाम कैसे दिया जा सकता है? संसार की और भी कई रहस्यमयी घटनाओं को लेकर ये सोचने पर भी मजबूर हुआ जा सकता है कि क्या ये दुनिया वास्तविक है? या ये भौतिक दुनिया काफ़ी हद तक एक भ्रम है। 
इसका नियंत्रण ईश्वर के पास है या किसी विशेष तकनीकी द्वारा मनुष्य के जीवन को नियंत्रित किया जा रहा है क्या मनुष्य की क्लोनिंग की जा रही है? क्या मैट्रिक्स के सिद्धांतों का असर हमारी जीवन प्रणाली पर भी है इन सब के अलावा वो कौन सी ऊर्जा है जो हमारे मन और आत्मा को बांधे रखती है? ऐसे कुछ प्रश्न हैं जो इस जीवन को रहस्यमयी बनाते हैं और ना जाने असंख्य, अनगिनत विषय जो रहस्य की परतों से घिरे हुए हैं जिसे कभी उजागर नहीं किया जा सकता है| विश्वभर में हो रही आकस्मिक घटनाएँ क्या ये सब सुनियोजित हैं? इस प्रश्न का उत्तर अपने आप में ही एक प्रश्न बना हुआ है।
हमारे मन की हर स्थिति ही हमारे लिए एक मैट्रिक्स है।
हम आम इंसान तो बस इतना जानते हैं कि इस जीवन का हर एक क्षण एक रहस्य है इसलिए अपने सात्विक कर्मों को करते हुए इस जीवन के अंत तक जाना है वास्तविक दुनिया और आध्यत्मिक संसार का अवलोकन हमें स्वयं ही करना होगा प्रकृति द्वारा दिया गया हमारे जीवन का अनुभव और हमारे मन की हर स्थिति ही हमारे लिए एक मैट्रिक्स है। अगर इस संसार को नियंत्रित करने की कोशिश भी कहीं से की जा रही है तो उन्हें भी ये सोचना होगा की प्रकृति से बड़ा कोई भी नहीं। इन संयोगों के संकेतो में भी कहीं ना कहीं उसकी मरजी है और उसकी इस रहस्यमई सरंचना से छेड़छाड़ करना मानव सभ्यता का अंत करने जैसा ही होगा । मानव को प्रकृति द्वारा खींची गई इस रेखा का सम्मान करना होगा अन्यथा इस पृथ्वी का विनाश निश्चित है।

कोमल अरन अटारिया
निर्देशक,लेखक,साहित्यकार














































