पायलट ने बढ़ाया गहलोत से दोस्ती का हाथ!

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

जयपुर । राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस पार्टी में दो अलग-अलग दूरी है पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट । दोनों के बीच लंबे समय से मन मुटाव चला आ रहा है।  दोनों के बीच दूरियां सार्वजनिक रूप से भी झलकती है और जब एक साथ बैठने तब भी दिखता है दोनों की  बयान बाजी में भी साफ देखा जा सकता है।  लेकिन एक ही पार्टी में दो दिग्गज नेता लगातार एक दूसरे के खिलाफत करके न पार्टी का फायदा कर सकते हैं ना खुद का फायदा कर सकते हैं। नुकसान दोनों का ही होता है । ऐसे में सचिन पायलट ने लंबे समय बाद अपने पिता की पुण्यतिथि जो 11 जून को दौसा में मनाई जानी है, उसके लिए आमंत्रित करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के घर गए ,उनसे शिष्टाचार मुलाकात की और उन्हें 11 जून को दौसा में कार्यक्रम में आने के लिए आमंत्रित किया।  ऐसा नहीं कि सचिन पायलट पहली बार ऐसा कोई कार्यक्रम कर रहे हैं । सचिन पायलट जब से उनके पिता का निधन हुआ है उसके बाद से हर साल दौसा में यह श्रद्धांजलि सभा करते हैं ।  सचिन पायलट सबको आमंत्रित करते थे लेकिन गहलोत को कभी नहीं करते थे।  इस बार उन्होंने सभी तरह के गिले शिकवे दूर करते हुए आपस के मनभेद दूर करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के घर जाकर उन्हें  कार्यक्रम में के लिए आमंत्रित किया है।  पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत  कार्यक्रम में जाते हैं या नहीं जाते हैं यह दूसरा विषय है।  लेकिन कम से कम सचिन पायलट ने पहल की है और उसका पूरे राजनीतिक गलियारों में सकारात्मक मैसेज गया है । खासतौर पर उन कांग्रेसियों के लिए जो इस असमंजस में रहते हैं कि गहलोत के घर जाएं या पायलट के घर जाएं। गहलोत की जय जयकार करें या सचिन पायलट की जय जयकार करें । उन लोगों के लिए राहत की खबर है की कम से कम दोनों ने हाथ मिलाया और साथ-साथ बैठे । दोनों के बीच करीब आधा घंटा बातचीत भी हुई क्या बातचीत हुई यह तो वे ही जाने लेकिन पायलट से मुलाकात के बाद अशोक गहलोत में एक्स पर ट्वीट किया और लिखा कि राजेश पायलट के साथ उनके संबंध बहुत पुराने हैं ।जब वह पहली बार लोकसभा में चुनाव जीते थे तब वह और राजेश पायलट दोनों संसद में साथ-साथ थे। दोनों राजस्थान की राजनीति में सक्रिय थे इसलिए उनकी अच्छी मित्रता थी । दोनों समकालीन भी रहे हैं और गहलोत ने कहा कि वह उनका बहुत सम्मान करते थे। जाहिर सी बात है कि आपस के बीच की दूरियों को कम करने के लिए थोड़ा तुम झुको थोड़ा हम झुके वाले मामले पर जब आगे बढ़ा जाता है ,तो कहीं ना कहीं रास्ता निकल जाता है।  हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगा कि दोनों के बीच कटूता कम होगी । लेकिन फिर भी आस जगी है कि दोनों के बीच जो लंबे समय से वैचारिक मतभेद है जिसका पार्टी को भारी नुकसान हुआ है । वह कहीं ना कहीं कम होगी तो उसका लाभ पार्टी को मिलेगा । दोनों नेताओं को भी मिलेगा। देखना यह है कि पायलट की तरफ से बढ़ाया हुआ दोस्ती का हाथ गहलोत कितना निभाते हैं।  फिलहाल तो दोनों के साथ मिलने और संवाद करने की सकारात्मक चर्चा हो रही है। इसका असली संदेश तो 11 जून को ही पता लगेगा जब गहलोत स्वर्गीय राजेश पायलट की श्रद्धांजलि सभा में शामिल होते है।

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