डैमेज फील्ड का फील्ड मार्शल,,,,,……………….
“हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं” फिल्म के इस डायलॉग को पाकिस्तान ने कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया और भारतीय सेना की कार्यवाही पर करारी हार के बावजूद भी जश्न मना रहे हैं वैसे भी पाकिस्तान दुनिया का पहला और आख़िरी देश है जहाँ ज्ञान और विज्ञान दोनों ही अपनी हार मान लेते हैं| अपने अधिकतर एयरबेस क्षतिग्रस्त होने पर और पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा को सुरक्षित रखने में नाकाम एक आर्मी जनरल को पाकिस्तान की डैमेज फील्ड का फील्ड मार्शल बना दिया गया| उसकी वर्दी पर एक अहम पांच सितारा रैंक देकर उसे दुनिया के सामने जांबाज़ देशरक्षक का ख़िताब दे दिया है| इनसे कोई पूछे कि भई इन सबको ऐसी गहन सोच आखिर आती कैसे है? मुझे तो आज तक ये समझ नहीं आता की इस देश की नासमझ समझ के पीछे की क्या समझ है अब जो भी हो पाकिस्तान अपनी डैमेज फील्ड में जो चाहे करे पर पाकिस्तान के इस फील्ड मार्शल के मकसद को समझना अब और भी ज्यादा जरुरी हो जाता है| भारतीय सरकार और सेना को अब और भी अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि भारत से भरपूर मार खाने के बाद भी एक बिगड़ैल बच्चे की तरह वो कोई और शरारत करने से पीछे नहीं हटेगा| आसिम मुनीर ने कैसे अपने-आप को आजीवन के लिए सेना का सबसे बड़ा अधिकारी बनवा लिया? पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने आसिम मुनीर को पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आई.एस.आई का चीफ़ बनाया था फिर आठ महीने में ऐसा क्या हुआ जिसके चलते इमरान खान ने आसिम मुनीर को इस पद से हटा दिया उसका ट्रांसफर कहीं और कर दिया गया ये बात आसिम मुनीर के दिल में एक तीर की तरह लगी और अपना घायल सीना लेकर वो खामोश रहा,फिर उसके बाद कुछ वक़्त बीता और 2022 में आसिम मुनीर की सेना से सेवाएं समाप्त होने को ही थीं ठीक उससे पहले 24 नवम्बर 2022 को आसिम मुनीर ने अपना त्याग पत्र देने का प्रस्ताव रखा पर उस समय के रक्षा प्रमुख ने उसका इस्तीफा नामंजूर कर दिया और इसके ठीक तीन दिन बाद 27 नवम्बर 2022 आसिम मुनीर को कमर जावेद बाजवा के बाद पकिस्तान का अगला आर्मी चीफ़ बना दिया गया और इसके साथ पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार भी गिरा दी गई और इमरान खान को जेल भेज दिया गया| पाकिस्तान में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने सरकार बनाई अब आसिम मुनीर भी आर्मी चीफ़ के अधिकारों का फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी सरकार को निर्देश देने का हक़ रखने लगे थे वैसे भी सबको पता है की पाकिस्तान में एक प्रधानमंत्री से ज्यादा आर्मी चीफ़ की हैसियत होती है अब आसिम मुनीर का अगला मिशन था की तीन साल बाद यानि के 27 नवम्बर 2025 को उसका आर्मी चीफ़ का पद समाप्त हो जायेगा तो उसे बचाने के लिए अब क्या रणनीति बनाई जाये तो अपनी इसी रणनीति पर कार्य करते हुए उसने पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमन्त्री शहबाज़ शरीफ़ से अपने इरादों के चलते पाकिस्तानी आर्मी चीफ़ का कार्यकाल जो पहले तीन साल का हुआ करता था उसमें संशोधन करते हुए उसे पांच वर्ष के लिए करवा दिया और जब से पाकिस्तान बना है उसके पिछले 17 आर्मी चीफ्स से आगे निकलते हुए अपना ये कारनामा कर दिखाया और संवैधानिक तरीके से सफलता प्राप्त करते हुए अपने को 2027 तक आर्मी चीफ़ बनवा लिया।
अपने साथ-साथ अब जो भी सेना का चीफ़ होगा चाहे वो एयर चीफ़ हो या नेवी चीफ़ उन सभी के कार्यकाल भी पांच साल के लिए होंगे ऐसा करते हुए आसिम मुनीर ने अपने सेना के प्रमुख अधिकारियों को भी खुश कर दिया पर आसिम मुनीर की महत्वाकांक्षा की सोच की दूरी को समझ पाना इतना आसान नहीं था उसे अब अपने 2027 के बाद का भविष्य बनाना था इसलिए अपने इस खेल को आगे बढ़ाते हुए उसे कुछ तो करना ही था तभी भारत के पहलगाम में एक आतंकी घटना हुई और उसके बदले में भारतीय सेना ने करारा जवाब देते हुए पाकिस्तान के अन्दर पनप रहे आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया । इस पर पाकिस्तान की जवाबी कार्यवाही को भी नाकाम कर दिया| पूरी दुनिया ने पाकिस्तानी सेना की हार फिर से देखी पर इन सब से अनजान आर्मी चीफ़ आसिम मुनीर ने अपने देश की इस शर्मनाक हार के बदले अपनी सरकार से अपने सबसे बड़े मंसूबे में फतह हासिल कर ली और हमेशा-हमेशा के लिए ख़ुद को पाकिस्तानी इतिहास का दूसरा फील्ड मार्शल बनवा दिया यानी के अब आसिम मुनीर के जीते जी उसके बदन से पाकिस्तानी आर्मी की वर्दी कोई भी नहीं छीन सकता है अब वो चाहे तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों को ही सलामी देने को बाध्य नहीं है अब ये निर्णय पाकिस्तान की सरकार ने या यूँ कहिये की आसिम मुनीर ने खुद लिया है और यह निर्णय वहाँ की अवाम और दुनिया के लिए किस तरह से निर्णायक होगा ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा पर हाँ कुछ बयानों पर गहनता से सोचने की आवश्यकता है पहलगाम की घटना से पहले आसिम मुनीर ने 16 अप्रैल 2025 को इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम में विदेशों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को सम्बोधित करते हुए भारत और हिन्दुओं के खिलाफ कुछ विवादित बयान दिए थे जो उसकी भारत विरोधी मानसिकता और इस्लामिक कट्टरपन को दर्शाते हैं:
* हम हिन्दुओं से हर तरह से अलग हैं हमारा धर्म,रीति रिवाज,परंपरायें,विचार और महत्वाकांक्षायें अलग हैं और यही दो राष्ट्र सिद्धांत की नींव थीं हम एक नहीं बल्कि दो राष्ट्र हैं आपको अपने बच्चों को यह जरुर बताना चाहिए ताकि वे पाकिस्तान की कहानी कभी न भूलें|
* हमारे पूर्वजों ने बहुत बड़ी कुर्बानियां दी हैं और हमने भी इस देश के निर्माण के लिए बहुत कुछ त्यागा है,मेरे प्यारे भाइयों और बहनों,बेटे और बेटियों इस कहानी को कभी भी मत भूलना|
* पाकिस्तान का आधार कलमा ( विश्वास की इस्लाम घोषणा ) पर आधारित था|
* कश्मीर हमारे गले की नस रहेगा हम इसे नहीं भूलेंगें ,हम अपने कश्मीरी भाइयों को उनके ऐतिहासिक संघर्ष में नहीं छोड़ेंगें|
और इन्ही बयानों के बाद 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में भारत के नागरिकों को उनका धर्म पूछ कर मारा गया,किसी भी आतंकी घटना के पीछे एक गहन सोच और तैयारी होती है तभी तो अपने अंजाम तक पहुंचती है,आसिम मुनीर अब फील्ड मार्शल है अब वो अपने डैमेज फील्ड का बदला लेने के लिए कुछ तो बड़ा सोच ही रहा होगा भारतीय सरकार को भारतीय फील्ड को बचाने के लिए जल्द से जल्द आसिम मुनीर के नापाक इरादों को डैमेज करना ही होगा इस लेख की शुरआत में मैंने कहा था की हार के जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं इस सोच को भी सोचने का समय आ गया है कि वो लगातार हारते हुए भी भारत से जीतने की कोशिश कर रहा है कहीं ऐसा न हो कि फिर एक बार आतंकवाद को बढ़ावा देते हुए वो अपनी जीत को सुनिश्चित करने का प्रयास करे एक बेवकूफ़ मदारी अपनी हार और जीत की परवाह नहीं करता है उसे तो बस अपना नौसिखिया खेल दिखाने से मतलब होता है अब भारतीय सरकार को भी अपनी कुशल बाज़ीगिरी दिखाते हुए इस डैमेज फील्ड के फील्ड मार्शल को उसी की हदों में ही जकड़ कर रखना ही होगा|

कोमल अरन अटारिया
निर्देशक,लेखक,साहित्यकार










































