यूसुफ पिनारा ने छोड़ा 20 बीघा भूमि पर कब्जा

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

जोजवा के चारागाह को समर्पित की जमीन
ग्रामीणों ने किया सम्मान और श्रमदान, मॉडल चारागाह विकसित करने का लिया संकल्प
शाहपुरा-पेसवानी
भीलवाड़ा जिले के जोजवा गांव में सोमवार का दिन ग्रामीणों के लिए विशेष रहा। यहां स्थित रसीला भैरूंनाथ मंदिर के समीप की चारागाह भूमि पर श्रमदान करने पहुंचे ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब गांव के यूसुफ पिनारा ने अपने कब्जे से 20 बीघा भूमि छोड़ते हुए उसे चारागाह के लिए समर्पित कर दिया। यूसुफ के इस त्याग भाव से ग्रामीणों ने उनका दुपट्टा पहनाकर सार्वजनिक रूप से सम्मान किया।
यह भूमि पहले यूसुफ पिनारा की बागवानी फसल से आच्छादित थी। अब यह जोजवा के 250 बीघा चारागाह के विकास अभियान का हिस्सा बनेगी, जो स्थानीय ग्रामीणों द्वारा शुरू किया गया है। इस अभियान का संचालन रसीला भैरूंनाथ चारागाह विकास समिति और सुविचार परिवार द्वारा किया जा रहा है, जिसमें हर अमावस्या को श्रमदान करने का निर्णय लिया गया है।
श्रमदान कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग–
कार्यक्रम में भारतीय किसान संघ के शिवकुमार पगारिया, अखिल भारतीय पर्यावरण प्रमुख राकेश जैन, अपना संस्थान के प्रांतीय संयोजक विनोद कुमार मौलाना, एफ.ई.एस. के मयूर व परमेश्वर सिंह, चारागाह विकास समिति के अध्यक्ष व सरपंच चांदमल कुमावत, सचिव मदन सिंह राजपूत, घीसू लाल धाकड़, कैलाश चंद्र तेली, निर्मल धाकड़ समेत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
कार्यक्रम की मुख्य गतिविधियाँ–
सुबह 7 बजे से 8 बजे तक सामूहिक श्रमदान किया गया। ग्रामीणों ने गैंती, फावड़े चलाकर खाई खोदने, पौधारोपण हेतु गड्ढे खोदने और तारबंदी के कार्यों में भाग लिया। मनरेगा के तहत चारागाह पर कंटूर निर्माण, चैक डैम एवं मेडबंदी का कार्य भी प्रगति पर है। वर्षा ऋतु से पहले सघन पौधारोपण करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
जोजवा का संकल्प, राज्य का मॉडल चारागाह–
गांववासियों ने जोजवा के चारागाह को राजस्थान में एक मॉडल चारागाह के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगी बल्कि पशुओं के लिए चरागाह उपलब्ध करवाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी।
जन सहयोग की मिसाल बना जोजवा–
इस सामूहिक प्रयास में सामाजिक कार्यकर्ता भंवरलाल जांगीड़, उदयलाल खटीक, रतनलाल साहू, जमनालाल सोनी, भैरूलाल शर्मा, लक्ष्मण प्रजापत, शंभूलाल शर्मा जैसे कई नागरिकों ने भाग लिया और स्वेच्छा से श्रमदान किया।
कार्यक्रम के अंत में शिवकुमार पगारिया ने सभी सहयोगियों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जोजवा अब जन सहयोग से बदलाव की मिसाल बनेगा।

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