मणिपुर में मोहनराम पूनियां ने 38 लोगों की बचाई थी जान, पैर में गोली लगने के बावजूद मोहनराम ने अदम्य साहस और वीरता का दिया था परिचय
राष्ट्रपिता द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित, डीडवाना के बुग़ालियों की ढाणी निवासी है सूबेदार मोहनराम पूनिया
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
विमल पारीक कुचामनसिटी।
डीडवाना के जिले के खाखोली ग्राम के बुगालियों की ढाणी निवासी सूबेदार मोहनराम पूनिया को उनकी वीरता और अदम्य साहस के लिए राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। गत दिवस दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में राष्ट्रपति ने सूबेदार मोहनराम पूनिया को शौर्य चक्र से पुरस्कार किया।
मोहनराम पूनिया सेना की 20 जाट रेजीमेंट में कार्यरत
आपको बता दें कि मोहनराम पूनिया सेना की 20 जाट रेजीमेंट में कार्यरत है। जनवरी 2024 में मोहनराम पूनिया अपनी रेजीमेंट के साथ मणिपुर के अति संवेदनशील इलाके में तैनात थे। इस दौरान उन्हें सूचना मिली कि दो गांवों में सशस्त्र उपद्रवी, आम लोगों पर हमला कर रहे हैं और आगजनी की कोशिश कर रहे हैं। इस पर सूबेदार मोहनराम पूनिया अपनी टुकड़ी के साथ मौके पर पहुंचे, तभी उनकी उपद्रवियों से मुठभेड़ हो गई। तभी अचानक उपद्रवियों की गोलीबारी में एक गोली मोहनराम पूनिया के पैर में जा लगी, इससे उनका काफी खून बह गया। इसके बावजूद उन्होंने उपचार लेने के बजाय वीरता और साहस दिखाते हुए खुद की जान की परवाह किए बगैर 38 लोगों की जान बचाकर उन्हें सुरक्षित निकाल लिया।
राष्ट्रपति द्वारा सूबेदार मोहनराम को शौर्य चक्र से सम्मानित किया
सूबेदार मोहनराम अब स्वस्थ है और उनका जख्मी हुआ पैर काफी हद तक ठीक हो चुका है। राष्ट्रपति द्वारा सूबेदार मोहनराम को शौर्य चक्र से सम्मानित किए जाने पर जिले में खुशी की लहर है। जिले के अनेक पूर्व और वर्तमान सैनिकों ने उन्हें शुभकामनाएं दी है, वहीं परिजनों में भी खुशी का माहौल है।
















































