लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
किसान के बाजरे के खेत में आया टाइगर, ट्रेंकुलाइजर वन विभाग ने छोड़ा जंगल
लोकेश टटवाल की रिपोर्ट
सवाई माधोपुर । जिला मुख्यालय रणथंभौर नेशनल पार्क के नजदीक कुंतालपुर मालियां गांव में आज सुबह बाजरे के खेत में टाइगर देखकर हड़कंप मच गया। डरे सहमे किसान ने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। इसके पश्चात वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और टाइगर को ट्रेंकुलाइज कर आमाघाटी वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं की गई कि आखिर कौन से नंबर का टाइगर किसान के खेत में घुसा। लेकिन सूत्रों की माने तो बाघिन सुल्तान की बेटी का खेत मे आना सामने आरहा है। गनीमत यह रही कि किसान खेत में कार्य कर रहा था तभी अचानक टाइगर को देखकर किसान ने अपने आपको सुरक्षित किया और उसके पश्चात अपने खेत मे्ं बाघ के आने की सूचना अधिकारियों को दी।
पिछले दिनों से हो रहे हैं टाइगर आक्रामक
हालांकि रणथंभौर से सटे आसपास के गांवो में लगातार रणथंभौर से वन्यजीवों की आवक- जावक बढ़ गई है । लेकिन रणथंम्भोर में पिछले एक माह में एक 10 वर्षीय बच्चे कार्तिक जो कि रणथंभौर में गणेश भगवान के दर्शन के लिए अपने परिजनों के साथ आया था, जिसे रास्ते से गुजरते समय शिकार बना लिया था। इसी शावक कनकटी ने अपना शिकार बना लिया था। वहीं 12 मई को फिर से जोगी महल के पास देवेंद्र चौधरी रेंजर को अपना शिकार बना लिया था । ऐसी घटनाओं के लगातार बढ़ने से वन विभाग के अधिकारियो की चिंता बड़ी हुई है।
एक और वन विभाग के अधिकारियों पर वन्यजीवों की मॉनिटरिंग सही ढंग से नहीं करने के आरोप भी लग रहे हैं, लगातार रणथंबोर में ऐसी घटनाओं का होना चिंता का विषय है । इन दोनों घटनाओं के बाद वन विभाग के अधिकारी बैठक कर हमलावर बाघिन शावक कनकटी को चिन्हित कर उसे अन्यत्र भेजे जाने पर विचार विमर्श कर रहे हैं। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया । लेकिन घटना क्रम को देखते हुए जल्द ही ऐसा किया जाना संभव हो सकता है । इसके चलते कनकटी को अन्यत्र शिफ्ट किया जा सकता है । जिससे की सुरक्षा की दृष्टि भविष्य में कोई हादसा नहीं हो। बाघ के द्वारा लगातार इंसानों पर बढ़ता हमला चिंता का विषय है।
अधिकारी लगातार मॅानिटरिंग में जुटे
रणथंम्भोर के अधिकारी लगातार बाघों की मॉनिटरिंग में जुटे हैं लेकिन आज जिस तरह फिर कुतलपुरा मालियान गांव में बाघ के मूवमेंट ने वन विभाग के अधिकारियों की मॉनिटरिंग की पोल खोल दी है । इस मामले में जब वन्य अधिकारियों व रणथंभौर के उच्च अधिकारियों से मीडिया के सवाल जवाब किए जाने पर चुप्पी साधे रहना से ,रणथंम्भोर के अधिकारियों की कार्य व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।










































