झीलों के शहर उदयपुर की शाही झलक – सिटी पैलेस की सैर

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

 राखी जैन वरिष्ठ पत्रकार

राजस्थान की मेरी यात्रा इस बार मुझे लेकर आई है उदयपुर, और जैसे ही शहर में दाखिल हुई, ऐसा लगा मानो समय पीछे की ओर बहने लगा हो। अरावली की पहाड़ियों से घिरा, झीलों से सजा और राजसी संस्कृति में डूबा – उदयपुर अपने नाम के हर अर्थ को जीता है। उदयपुर शहर, जितना खूबसूरत पानी की झीलों से है, उतना ही आकर्षक है इसकी रॉयल शान से।

उदयपुर की सैर की शुरुआत अगर सिटी पैलेस से न की जाए तो कुछ अधूरा लगता है। पिछोला झील के किनारे खड़ा यह भव्य महल, मेवाड़ की शौर्यगाथा का गवाह है। उदयपुर की शान सिटी पैलेस शानदार महलों का एक समूह है जो मेवाड़ के राजपूत राजवंश की कहानी सुना रहा है। सिटी पैलेस की नींव महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने 1559 में रखी थी। जब उन्होंने उदयपुर को मेवाड़ की नई राजधानी के रूप में स्थापित किया। इसके बाद, लगभग 400 वर्षों तक विभिन्न शासकों ने इस महल का विस्तार किया। जिससे यह आज देश के दूसरे सबसे बड़े महलों में से एक बन चुका है।

यह महल भारतीय, मुगल, यूरोपीय और राजस्थानी स्थापत्य कला का अनूठा मिश्रण है। इसमें खूबसूरत चबूतरे, किलेबंदी, शीश महल, झरोखे, बगीचे और भव्य द्वार बनाए गए हैं। यहां का मोती महल, शीश महल, कृष्ण विलास, और जनाना महल विशेष रूप से दर्शनीय हैं।

सिटी पैलेस न केवल स्थापत्य का अद्भुत नमूना है, बल्कि हर कोने में एक कहानी बसती है। संगमरमर और ग्रेनाइट से बनी इसकी नक्काशीदार दीवारें, रंग-बिरंगी कांच की खिड़कियां, दरबार हॉल और राजसी गलियारे सब कुछ आपको एक अलग ही ज़माने में ले जाते हैं।

महल से झील का जो नज़ारा दिखता है, वो किसी पेंटिंग से कम नहीं लगता। यहाँ खड़े होकर जब आप पिछोला झील में तैरती नावों को देखते हैं या जग मंदिर और लेक पैलेस की झलक पाते हैं तो समय थम सा जाता है।

और हाँ, इस खूबसूरत सफर को और भी खास बनाते हैं योगेश शर्मा के लेंस से खींचे गए दृश्य, जो इस महल की आत्मा को कैद करते हैं।

योगेश शर्मा वरिष्ठ छायाकार एवं वीडियो जर्नलिस्ट 

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‘मेरी ट्रैवल डायरी’: राजस्थान की झलक राखी जैन -योगेश शर्मा के साथ

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