वास्तविक जागरूकता से बहुत दूर दलित समाज- सीमा

0
84
- Advertisement -
सीमा हिंगोनिया
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक

मोबाइल और इंटरनेट से फैल रहा है भ्रामक प्रचार

तकनीकी विकास के साथ आज हर घर , हर व्यक्ति और हर हाथ में मोबाइल और इंटरनेट पहुंच गया है और इस की वास्तविक उपयोगिता का ज्ञान दलित समाज को बिल्कुल नहीं है वैसे औरों के हालत भी कुछ अच्छे नहीं हैं पर दलितों में शिक्षा का अत्यधिक अभाव होने से इनकी स्थिति ज्यादा गंभीर है। इस सोशल मीडिया क्रांति ने दूर दराज बैठे दलित को आपस में जोड़ा है और संसार भर की जानकारी भी उपलब्ध कराई है और थोड़ी सी जागरूकता भी लाई है लेकिन जहां अन्य सभी जातियों और समाजों ने इसका भरपूर सदुपयोग किया है वहीं यह दलित समाज इसका सदुपयोग नहीं कर पा रहा है बल्कि फेक जानकारी के माया जाल में फंसा पड़ा है।
साथ ही गलत ,भ्रामक ,आलोचनात्मक , वैमनस्यता ,कटुता से भरी जानकारियों को लगातार शेयर ,फॉरवर्ड ,कट ,पेस्ट ,करने में लगा है, सही और गलत की पहचान किए बिना सारा दिन सिर्फ और सिर्फ शेयर फॉरवर्ड में व्यस्त हो कर अपना समय तो खराब कर ही रहा है। साथ ही गलत भ्रामक जानकारी के प्रचार प्रसार में योगदान भी दे रहा है, जिससे अन्य लोग जो कम पढ़े लिखे अशिक्षित हैं ,आज वास्तविकता से कोसों दूर हो गए हैं ।

अनभिज्ञ और अधूरे ज्ञान के चलते भर्मित को हो रहा है दलित समाज


पहले जानकारी कम थी तो व्यक्ति स्वयं को कम जानकर तो मान लेता था आज कचरे से भरे मोबाइल की जानकारी से भी हर व्यक्ति स्वयं को अन्य से ज्यादा ज्ञानी मानकर आपस में टकराने से भी परहेज नहीं करता बल्कि सोशल मीडिया को ही युद्ध का मैदान और स्वयं को योद्धा मानकर बदलाव की क्रांति करने निकल पड़ा है और यह सारे दिन इसी युद्ध में लगा रहता है ,इस अवास्तविक भ्रामक दुनिया में दलित का फंसने का कारण उसका वास्तविक जरूरी शिक्षा से बहुत दूर होना ही है जब तक वह शिक्षित नहीं होगा तब तक स्वयं सोचने समझने ,लिखने ,तर्क करने ,प्रश्न करने की क्षमता उसमें विकसित हो ही नहीं सकती है ,और इस मोबाइल की दुनिया ने तो दलित समाज को और अधिक पीछे लाकर खड़ा कर दिया है आज बिना सोचे समझे, बिना पढ़े, वैमनस्यता से भरे ,और भ्रामक संदेशों को फॉरवर्ड और शेयर करने को ही जागरूकता ,क्रांति , बदलाव और विकास मान लिया गया है।
और इसमें बड़ा योगदान उन लोगों का ज्यादा है जो थोड़ा सा पढ़ लिख गए हैं और अपने को बाबा साहब के बराबर मानने लगे है।अर्थात् दलित आज बाबा साहब के शिक्षा के सपने को चूर चूर करने में लगा पड़ा है।
अतः सबसे पहले किताबों से दोस्ती करें ,फिर सोचे समझे ,फिर खुद से लिखे ,खुद से प्रश्न करें ,खुद से जबाव देना शुरू करें, फिर प्राप्त वास्तविक ज्ञान को ही आगे बढ़ाएं ,और कट पेस्ट फॉरवर्ड शेयर की दुनिया से बाहर निकले । तब ही सम्पूर्ण दलित समाज में वास्तविक जागरूकता आयेगी बदलाव और विकास आएगा।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here