लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर (आर एन सांवरिया)। राजस्थान में बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने आमजन को सतर्क रहने के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस वीके सिंह ने बताया कि जालसाज खुद को TRAI या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को ठग रहे हैं।
ठगी के मुख्य तरीके
राजस्थान पुलिस के साइबर सेल के पुलिस अधीक्षक शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि अपराधी मुख्य रूप से चार तरीकों से लोगों को फंसाते हैं:
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डिजिटल अरेस्ट
अपराधी खुद को CBI, पुलिस, कस्टम या ED का अधिकारी बताते हैं। वे दावा करते हैं कि आपके आधार कार्ड या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल गंभीर अपराधों में हुआ है। वीडियो कॉल पर डराकर मोटी रकम ट्रांसफर करवाते हैं। -
सिम डीएक्टीवेशन और केवाईसी फ्रॉड
मोबाइल पर मैसेज भेजकर केवाईसी अपडेट करने के बहाने फर्जी ऐप या लिंक क्लिक करवाते हैं। इससे आपका सिम स्वैप हो जाता है और बैंकिंग ओटीपी चोरी हो जाती है। -
मोबाइल टावर का फर्जी लालच
ग्रामीण क्षेत्रों में ठग जमीन पर टावर लगाने का लालच देकर ₹20,000–₹50,000 मासिक किराया या लाखों रुपये एडवांस मांगते हैं और फिर ऐंठ लेते हैं। -
फर्जी सरकारी पत्र
अपराधी TRAI, CBI या DoT के फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर ईमेल या पत्र भेजते हैं और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर पैसे ऐंठते हैं।
ऐसे बचें ठगी से
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सत्यता जांचें: TRAI कभी किसी को वीडियो कॉल पर पूछताछ या डिजिटल अरेस्ट नहीं करता।
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अनजान कॉल से बचें: किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा डराने पर तुरंत कॉल काट दें।
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गोपनीयता बनाए रखें: व्यक्तिगत जानकारी, बैंक विवरण या OTP किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
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वेरिफिकेशन करें: टावर इंस्टॉलेशन या किसी सरकारी कार्रवाई की पुष्टि आधिकारिक वेबसाइट dot.gov.in से करें।
तुरंत शिकायत करें
यदि आप या आपके आस-पास कोई इस तरह की ठगी का शिकार हो, तो तुरंत सूचना दें:
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हेल्पलाइन: 1930
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विशेष हेल्पडेस्क: 9256001930 / 9257510100
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ऑनलाइन पोर्टल: https://cybercrime.gov.in
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नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि इस प्रकार की ठगी के प्रति पूरी सतर्कता बरतें और किसी भी दबाव में न आएं।


















































