लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नागौर (प्रदीप कुमार डागा)। नागौर नगर में इस वर्ष होलिका दहन को लेकर विद्वानों के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई है। पंडित मोहनराम स्वामी ने बताया कि दीपावली पर्व की भांति इस बार होलिका पर्व के निर्धारण को लेकर भी नूतन गणनाओं के आधार पर कुछ भ्रम की स्थिति उत्पन्न की गई है।
उन्होंने कहा कि निर्णय सागर के प्राचीन पंचांगों में भद्रा उपरांत होलिका दहन का स्पष्ट उल्लेख है, जबकि कुछ आधुनिक विचारधारा के लोग अपने मत को प्राथमिकता दे रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में रक्षाबंधन और होलिका दहन सर्वथा त्याज्य माना गया है। अत्यावश्यक स्थिति में भद्रा की पुच्छ में रात्रि 1:23 से 2:35 बजे तक होलिका दहन किया जा सकता है।
निर्णय सिन्धु के अनुसार—
“भद्रायां दीपिता होली राष्ट्रभंगं करोतिवै । नगरस्य च नैवेष्टा तस्मात्तां परिवर्जयेत् ।।”
“भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा, श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी ।।”
पूर्णिमा को ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण होने की स्थिति में निर्णय सिन्धु में निर्देश है कि भद्रा रहित रात्रि में ही होलिका दहन किया जाए। पंडित मोहनराम स्वामी के अनुसार यदि पूर्णिमा को चंद्रग्रहण हो तो उससे पूर्व रात्रि में, जब भद्रा न हो, उसी समय होली जलाना उचित है। यदि दूसरे दिन ग्रसा हुआ उदय हो तो पहले दिन भद्रा रहित चौथे पहर या भद्रा की पुच्छ में होलिका दहन करना चाहिए।
नागौर के विद्वानजनों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि 3 मार्च 2026 को प्रातः 5:30 से 6:00 बजे के बीच भद्रा उपरांत होलिका दहन करना उत्तम रहेगा। रंग छारंडी (धुलंडी) पूर्णिमा 3 मार्च 2026 को ही मनाई जाएगी।
चंद्रग्रहण 3 मार्च 2026 को रहेगा। भोजन का सूतक प्रातः 6:20 बजे से (बाल, वृद्ध और रोगियों को छोड़कर) तथा जल का सूतक प्रातः 9:20 बजे तक रहेगा। चंद्रग्रहण का प्रारंभ दोपहर 3:20 बजे तथा मोक्ष सायं 6:47 बजे होगा। इसके पश्चात स्नान, देवपूजन आदि करना शास्त्रोक्त रहेगा।
यह मत नगर सेठ बंशीवाला एवं अन्य मंदिरों में भी मान्य किया गया है।
पूर्व में भी बनी थी ऐसी स्थिति
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21 मार्च 1913 (शुक्रवार)
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21 मार्च 1932 (सोमवार)
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22 मार्च 1951 (गुरुवार)
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02 मार्च 1961 (गुरुवार)
पंडित मोहनराम स्वामी ने नागरिकों से आग्रह किया है कि शास्त्रसम्मत समय पर ही पर्व मनाएं और किसी भी प्रकार के भ्रम से बचें।

















































