विधायक डीसी बैरवा तहसीलदार प्रकरण में आगे क्या?

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

विधायक डीसी बैरवा तहसीलदार प्रकरण में नोटिस जल्द

विधायक की शिकायत पर विशेषाधिकार हनन कमेटी का गठन

स्पीकर ने दिया उचित कार्रवाई का भरोसा

कांग्रेस विधायकों ने की थी विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत

अब तहसीलदार गजानंद मीना पर गिर सकती है गाज

जयपुर ।  विधायक  डीसी बैरवा – तहसीलदार विवाद में आगे क्या होगा …. तो आपको बता दे की दौसा विधायक के साथ तहसीलदार का जो विवाद सामने आया था उसमें तहसीलदार ने विधायक के एक जानकारी लेने पर थाने में बंद करने की धमकी  दी थी। यहां तक की लोगों के सामने बुरी तरह से फटकार दिया था।  इस मामले को खुद विधायक ने भी सदन में उठाया था और कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को ज्ञापन भी दिया था।

क्या था पुरा मामला……

दोसा शहर में 2 फरवरी को तहसीलदार गजानन मीना सरकारी जमीन पर बसे लोगों को हटा रहे थे।  दौसा में पिछले कुछ दिनों से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही चल रही थी जिसको लेकर लगातार लोग स्थानीय विधायक डीसी बैरवा से मुलाकात कर रहे थे । लोगों का कहना था कि उन्होंने यहां पर जमीन  सोसाइटी पट्टों पर खरीदी है और अपनी खून पसीना की कमाई लगाकर घर बनाए हैं।  अब जिला प्रशासन बगैर किसी नोटिस  तोड़ रहा है।  2 फरवरी को भी जब डीसी बेरवा किसी कार्यक्रम में जा रहे थे तो अतिक्रमण विरोधी दस्ता मकान तोड़ रहा था।  लोग विरोध कर रहे थे और सामान  बचाने ने की गुहार कर रहे थे, तो डीसी बैरवा घटनास्थल पर पहुंचकर पहले जिनके मकान टूट रहे थे उनसे जानकारी जुटाई और फिर उन्होंने पूछा भाई यह कार्रवाई कौन करवा रहा है।   तब तहसीलदार साहब ने कहा कि यह कार्रवाई हम करवा रहे हैं ,फिर तहसीलदार से पूछा किसके निर्देश पर कार्यवाही हो रही है।   गरीबों को क्यों परेशान किया जा रहा है, इस पर तहसीलदार ने कहा कि है सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है, इसलिए हटा रहे हैं। आप अपना काम करो । तब विधायक  ने कहा कि सरकारी जमीन पर तो पूरा दौसा बसा हुआ है पूरा राजस्थान में बहुत सारे लोग बसे हैं  तो  क्या सबको तोड़ दोगे?   मैं  यहां  का   विधायक हूं  इसलिए  जानना चाहता हूं।  तब तहसीलदार ने कहा कि मैं  यहां  का  तहसीलदार  हूं  यहां  का  मालिक हूं,  जमीन  मेरी  है।  यह सरकारी जमीन है मैं इसका मालिक हूं और मेरे को आदेश कौन देने वाला है?  मैं ही आदेश देने वाला हूं, मैं ही पालन करने वाला हूं ,आप अपना काम करो, हटो यहां से। एक विधायक जो  जन प्रतिनिधि है जनता के द्वारा चुनाव हुआ है वह सरकार के करिंदों को इस बात को पूछ सकता है, जान सकता है ,जानकारी ले सकता है कि आखिरकार यह कार्यवाही किस एक्ट के तहत हो रही है या किसके निर्देश पर हो रही है लेकिन तहसीलदार यहां विधायक को सार्वजनिक तौर पर एक शिष्टाचार के नाते ना तो सलीकी से बात करता है ,ना विधायक को सही उत्तर देता है । बल्कि उसे धमकता है और जिस शैली में बात करता है उसका तरीका बिल्कुल भी सभ्यता नहीं है । क्योंकि लोकतंत्र में अधिकारी जन सेवक होता है मालिक नहीं होता है।  जनप्रतिनिधि भी लोकसभा की होता है और जनता का मामला जुड़ा हुआ था इसीलिए वह जानना चाह रहा था।  लेकिन यहां विधायक के प्रति एक तहसीलदार का रवैया बिल्कुल ही नकारात्मक था जो कोई भी पसंद नहीं करेगा।  इस दौरान विधायक ने कार्रवाई रोकने के लिए कहा तो तहसीलदार ने  आपके यहां से हट जाइए वरना आपके साथ गलत हो जाएगा, आपको बंद कर दिया जाएगा।  इसके बाद दोनों एक दूसरे पर चीखते चिल्लाते हैं और विधायक अपना  सा  मुँह निकल जाते हैं।   इस पूरे घटनाक्रम में जो तहसीलदार का रवैया है वह थोड़ा नेगेटिव ज्यादा है । उनका आचरण एक जनसेवक का नहीं होकर एक तानाशाही व्यक्ति जैसा नजर आता है,  उसे से लोग मच्छर मक्खी की तरह नजर आ रहे हैं और जनप्रतिनिधि की उसके सामने कोई औकात ही नहीं है, ऐसा उसका आचरण दिखता है यही विवाद की जड़ है ।

विधानसभा तक पहुंचा मामला

विधायक डीसी बैरवा के साथ तहसीलदार के आचरण को लेकर खुद डीसी बैरवा ने सदन में दो बार यह मामला उठाया और कहा कि एक जन प्रतिनिधि के प्रति एक अधिकारी का यह व्यवहार ठीक नहीं है, इसमें एक्शन होना चाहिए।  उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की।  गृह राज्य मंत्री और अन्य मंत्रियों से भी मुलाकात की।  इसके बाद कांग्रेस विधायक दल का एक प्रतिनिधि मंडल विधानसभा अध्यक्ष से मिला और अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीरता से देखते हुए इसके लिए विशेष अधिकार हनन कमेटी का गठन किया।  विधानसभा अध्यक्ष ने प्रकरण की जानकारी के लिए  जिला कलेक्टर को भी विधानसभा बुलाया लेकिन जिला कलेक्टर विधानसभा में हाजिर नहीं हुए।  जब एक कलेक्टर विधानसभा अध्यक्ष के आदेश से भी अगर विधानसभा नहीं आता है तो कहीं ना कहीं यह ब्यूरोक्रेसी के हावी होने का प्रमाण है।

अब आगे क्या होगा

डीसी बैरवा तहसीलदार प्रकरण में विधानसभा अध्यक्ष ने विशेष अधिकार हनन कमेटी का गठन कर दिया है । अब यह कमेटी दोनों को विधानसभा में बुलाएगी पूरे मामले की जानकारी जुटाएगी   और पूरे मामले की जानकारी के बाद में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्य की जाएगी।   जिस तरह के वीडियो वायरल हुए हैं और जिस तरह का व्यवहार तहसीलदार का विधायक के प्रति रहा है वह वाकई में निंदनीय है।   इस प्रकरण में तहसीलदार साहब की नौकरी जा सकती है, उन्हें सस्पेंड किया जा सकता है।  अगर उनके प्रति थोड़ी सहानुभूति रखी जाए तो उन्हें एपीओ किया जा सकता है या उनका इंक्रीमेंट रोका जा सकता है। भविष्य में आचरण सुधारने के लिए पाबंद किया जा सकता है।

इस तरह के मामलों से जातीय संगठनों को बनाने चाहिए दूरी

आजकल जब इस तरह की प्रकरण सामने आते हैं तो जातिगत संगठन अपने-अपने लोगों का पक्ष लेकर सोशल मीडिया पर जमकर एक दूसरे पर कटाक्ष करते हैं।  एक दूसरे को टारगेट करते हैं जो कि सरासर गलत है । क्योंकि यह किसी जाति विशेष की लड़ाई नहीं होती है।  अधिकारी ने अपना काम किया , विधायक ने अपना काम किया और अपना अपनी ड्यूटी निभाते हुए जो अधिकारी कर सकता है उसने किया और  जो विधायक को करना था उसने किया।  दोनों में से कौन गलत है, कौन सही है इसका निर्णय अब वह कमेटी करेगी।  लेकिन इसी बीच जो जातिगत संगठन है उन्होंने एक दूसरे की जातियों को लेकर खूब जमकर जहर उगला जो गलत है क्योंकि यह कोई जातिगत लड़ाई नहीं है।  अपना कर्तव्य है जो उनको ईमानदारी से निभाना था कहीं ना कहीं उसको निभाने में उनमें कमी रही तो उसकी सजा मिलेगी। आजकल एक नया ट्रेंड हो गया इस तरह के मामले में सिर्फ सोशल मीडिया पर इस तरह की घटनाओं को दो जातियों के बीच , दो धर्म के बीच की लड़ाई की तरह दिखाया जाता है । कमेंट किए जाते हैं और कुछ लोग इसमें कितना इंवॉल्व हो जाते हैं कि वह उसका असर आपसी व्यवहार पर भी पड़ता है। सरकार और प्रशासन को भी चाहिए कि जब इस तरह के मामले हो तो जो सोशल मीडिया पर इस तरह के  वार चलते हैं उन पर एक्शन होना चाहिए। जिससे कि लोग इस तरह लोगों की भावनाओं को भड़काने का काम नहीं करें क्योंकि दोनों ने ही -अपनी जगह अपने कर्तव्य का पालन किया है । इसमें कौन गलत है कौन सही है इसका निर्णय तो हाई अथॉरिटी करेगी।

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