लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
चेनार (प्रदीप कुमार डागा)। रामसभा रामद्वारा में स्व. तीजा बाई की स्मृति में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के समापन अवसर पर कथा व्यास संत गोवर्धनदास महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समाज में गुरू खोजने की होड़ मची है, लेकिन वास्तविक आध्यात्मिक प्रगति के लिए स्वयं को पात्र शिष्य बनाना आवश्यक है। यदि साधक ईमानदारी और निष्ठा से पात्रता विकसित करता है, तो ईश्वरीय विधान के अनुसार भगवान स्वयं उपयुक्त गुरु भेजते हैं।
महाराज ने गुरु के महत्व और शिष्य-पात्रता के उदाहरण भगवान दत्तात्रेय के प्रसंग से समझाए। उन्होंने बताया कि ज्ञान प्राप्ति के लिए केवल गुरु के दर्शन या वचन नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और सीखने की दृष्टि आवश्यक है। कथा महोत्सव में रुक्मिणी विवाह, सुदामा चरित, श्रीकृष्ण का गोलोक गमन और राजा परीक्षित के मोक्ष जैसे पावन प्रसंगों का संगीतबद्ध वर्णन किया गया।
समापन पर महाआरती हुई और हजारों श्रद्धालुओं ने भंडारे में महाप्रसादी ग्रहण की।















































