लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
विधायक डीसी बैरवा को दी एसडीएम ने थाने में बंद कराने ने की धमकी
12 बीघा जमीन से हटाये अतिक्रमण
एसडीम ने खुद को बताया जमीन का मालिक
दौसा। दौसा में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटा रहे प्रशासनिक अधिकारियों से जब दौसा विधायक डीसी बैरवा ने यह पूछा कि आखिरकार यहां पर यह तोड़फोड़ की कार्रवाही किसके आदेश पर हो रही है और गरीबों को क्यों उजाड़ा जा रहा है? यह गरीब तो कई सालों से बसे हुए हैं। इस बार मौके पर मौजूद एसडीम साहब ने कहा कि फालतू बात नहीं ,नहीं तो गलत हो जाएगा यह जमीन मेरी है मैं इसका मालिक हूं । सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाए जाएंगे इस पर विधायक ने फिर पूछा कि आप अतिक्रमण किसके आदेश से हटा रहे हैं ,तो उन्होंने कहा कि मैं एसडीएम हूं मैं इसका मालिक हूं, मुझे कौन आदेश देगा और मेरे से कौन आदेश की कॉपी देखेगा । विधायक ने कहा कि मैं यहां का विधायक हूं गरीबों के अतिक्रमा हटाए जा रहे हैं तो मैं जानना चाहता हूं कि क्यों हटाये जा रहे हैं।
एसडीएम की कार्रवाई सही लेकिन ज़न प्रतिनिधि से आचरण गलत
इस पर एसडीएम बोले आप अपना काम करो, फालतू बात मत करो वरना गलत हो जाएगा बंद कर दूंगा और जोरदार तरीके से हड़काने लगे। यहां तक की एसडीएम ने विधायक को थाने में बंद करने तक की धमकी दी। पुलिस कर्मियों को बुला लिया। विधायक डीसी बैरवा भी इसे तिलमिला उठे और उन्होंने कहा कि आप मुझे थाने में बंद कर दो लेकिन मैं गरीबों के अतिक्रमण हटाने नहीं दूंगा। विधायक और एसडीएम के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक होती रही । इस दौरान पुलिस के जवान भी आ गए, कुछ विधायकों के समर्थक भी आ गए और मामला बड़ी मुश्किल से शांत हुआ।
लेकिन करीब 3 मिनट तक चली नोंक झोंक में एसडीएम का रवैया डरावना था जैसे वह इस कायनात का सबसे ताकतवर इंसान हो और उसे किसी के भी आदेश मानने या सुनने की कोई जरूरत नहीं हो। वही सर्वे सर्वा हो। वह चाहता तो विधायक महोदय को बता सकता था कि यह कार्यवाही जिला कलेक्टर के निर्देश पर हो रही है, या शिकायत के आधार पर सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं। इसका एक शालीन तरीके से भी जवाब दिया जा सकता था लेकिन उसे पता था कि सामने वाला विधायक दलित वर्ग से है और विरोधी पार्टी से ये कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उसकी भाषा और रवैया से लगता है कि वह यह समझ रहा था कि आखिरकार इसकी औकात कैसे हुई मेरे से यह पूछने की कि मैं अतिक्रमण क्यों हटा रहा हूं? आपको बता दे की दौसा में करीब 12 बीघा सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाए गए हैं। यह कार्यवाही सरकारी स्तर पर की गई बिल्कुल सही हो सकती है । लेकिन जिस तरह का आचरण एक एसडीएम का स्थानीय विधायक के प्रति रहा वह सरासर अलोकतांत्रिक है । एसडीएम का फर्ज बनता है कि वह विधायक को इसकी जानकारी देता कि यह कार्यवाही किसके निर्देश पर की जा रही है और क्यों की जा रही है । क्योंकि एक जनप्रतिनिधि जो वहां का विधायक है। इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हुआ है उसको यह जानने का अधिकार तो है और उसकी आंखों के सामने कोई कार्यवाही हो रही है, तो उसका फर्ज बनता है कि वह उनके लिए लड़ाई लड़े और जाने । लेकिन एसडीएम को यह नागवार लगा । उसने इसको अपने इगो की लड़ाई मानी और विधायक को थाने में बंद करने की धमकी तक दे दी, जिससे अब विधायक के प्रति लोगों की सहानुभूति है, लोगों का कहना है कि एक विधायक के प्रति एक जन सेवक का आचरण ठीक नहीं है । एसडीएम के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए कम से कम उसे प्रोटोकॉल का पालन तो करना चाहिए। लोकतंत्र में सबको प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है । न्यायपालिका, कार्यपालिका, व्यवस्थापिका सभी को एक दूसरे का सम्मान करना पड़ता है ,तभी तो तंत्र चलता है लेकिन यदि सभी एक दूसरे पर हावी होने की और सार्वजनिक तौर पर इस तरह से करेंगे तो फिर आम जनता में इसका क्या मैसेज जाएगा। एक एसडीएम का जनप्रतिनिधि के प्रति इस तरह का रवैया सरासर गलत है। जिसकी सभी और निंदा हो रही है । लोगों का यहां तक कहना है कि यही हरकत यदि इस एसडीएम ने हनुमान बेनीवाल, रविंद्र सिंह भाटी या किसी और दूसरे मा के इलाके में कर दी होती तो पता लग जाता की दुर्व्यवहार क्या होता है उसका नतीजा क्या होता है।









































