लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
*शहीद स्मारक, जयपुर में ऐतिहासिक मजदूर महापंचायत
27 जिलों से हजारों मजदूरों की भागीदारी-
*यह कानून रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि मजदूरों की असुरक्षा की गारंटी है; निखिल डे
जयपुर। जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर मनरेगा बचाओ मोर्चा के आह्वान पर एक ऐतिहासिक मजदूर महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान के लगभग 27 जिलों से हजार से अधिक संख्या में मनरेगा मजदूर, महिलाएं, आदिवासी समुदाय और जनसंगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह महापंचायत पुलिस आयुक्त कार्यालय के सामने आयोजित की गई, जहां मजदूरों ने एक स्वर में VB–GRAM-G कानून को रद्द करने और मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल करने का संकल्प लिया।
महापंचायत में मजदूरों ने स्पष्ट किया कि मनरेगा कोई दया या राहत योजना नहीं, बल्कि संघर्षों से हासिल काम का कानूनी अधिकार है, जिसे किसी भी सूरत में छीना नहीं जाने दिया जाएगा। दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (VB–GRAM-G) लागू किया जाना देश के करोड़ों ग्रामीण मजदूरों, महिलाओं और वंचित समुदायों के साथ किया गया एक ऐतिहासिक विश्वासघात है।
प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं मनरेगा आंदोलन की अग्रणी *अरुणा रॉय* ने मजदूर महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि VB–GRAM-G संविधान की आत्मा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने पहली बार गांव के गरीब को राज्य से काम मांगने का अधिकार दिया था, जबकि VB–GRAM-G उस अधिकार को छीनकर रोजगार को केंद्र सरकार की मर्जी पर निर्भर बना देता है। यह कानून लोकतांत्रिक अधिकारों का नहीं, बल्कि केंद्रीकृत नियंत्रण का कानून है।
मनरेगा कानून के आंदोलन से लेकर उसके मसौदे निर्माण तक में अहम भूमिका निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता *निखिल डे* ने कहा कि VB–GRAM-G रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि मजदूरों की असुरक्षा की गारंटी है। काम, मजदूरी और योजना—तीनों को ग्राम सभा और राज्यों से छीनकर केंद्र के हाथ में सौंप दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अब काम मांगना मजदूर का कानूनी हक नहीं रहा; रोजगार कब, कितना और किसे मिलेगा—यह सब केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाएगा। इसका अर्थ है कि अधिकार आधारित कानून को एक केंद्र-नियंत्रित योजना में बदल दिया गया है।
*राज्यों पर आर्थिक बोझ, रोजगार में कटौती तय*
मनरेगा बचाओ मोर्चा ने कहा कि नए कानून में लाई गई Normative Allocation व्यवस्था के तहत राज्यों को पूर्व-निर्धारित और सीमित बजट दिया जाएगा, जो वास्तविक मांग से पूरी तरह कटा हुआ होगा।
VB–GRAM-G योजना निर्माण की प्रक्रिया को ग्राम सभा से छीनकर राष्ट्रीय आधारभूत ढांचे और केंद्रीय एजेंसियों (National Infrastructure Stack) के हवाले करता है।
*काम के घंटे 8 से बढाकर किये जा सकते हैं 12*
नए कानून में काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 घंटे किये जा सकते हैं इसका प्रावधान नए कानून में कर दिया गया है. इससे ऐसा प्रतीत होता है कि ये खुलेआम श्रम शोषण को वैध बनाता है।
*आदिवासी क्षेत्रों पर सीधा हमला*
साथ ही आदिवासी क्षेत्रों में पहले से मौजूद अतिरिक्त 50 दिन के रोजगार के प्रावधान को भी समाप्त कर दिया गया है, जिससे सबसे वंचित समुदायों पर सीधा हमला हुआ है।
*महिलाओं की आवाज़: मनरेगा हमारी जीवनरेखा*
हरमाड़ा की पूर्व सरपंच एवं मनरेगा आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाली *नोरती बाई* ने कहा कि मनरेगा महिलाओं के लिए जीवनरेखा से कम नहीं है। इसके आने से महिलाओं को सम्मान मिला, वे आर्थिक रूप से सक्षम हुईं और आत्मनिर्भर बनीं।
मजदूर किसान शक्ति संगठन से जुड़ी *सुशीला देवी* ने कहा कि सरकारें जनता के वोट से बनती हैं, लेकिन गरीब और वंचितों के हकों को कोई खत्म नहीं कर सकता। मनरेगा को खत्म कर मोदी सरकार ने बहुत बुरा काम किया है और इस सरकार को गरीब की हाय जरूर लगेगी।
*मजदूर संगठनों और राजनीतिक समर्थन*
अरावली मजदूर संघ से जुड़े भंवर लाल ने कहा कि सरकार ने मजदूरों के हक और अधिकारों पर सीधा प्रहार किया है। कोरोना महामारी के दौरान जब सब कुछ बंद था, तब श्रमिकों के घर का चूल्हा सिर्फ मनरेगा से ही चलता था।
इस अवसर पर शाहपुरा (जयपुर) के विधायक *मनीष यादव* , आमेर के विधायक *प्रशांत शर्मा,* आदर्श नगर जयपुर के विधायक *रफीक खान* , चाकसू के पूर्व विधायक *वेद प्रकाश सोलंकी* , बगरू की पूर्व विधायक *गंगा देवी,* विधायक प्रत्याशी *पुष्पेंद्र भारद्वाज* एवं *अर्चना शर्मा,* पूर्व विधायक व जयपुर देहात कांग्रेस जिलाध्यक्ष *गोपाल मीना* , जयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष *सुनील शर्मा* , सीपीआई के राज्य सचिव कामरेड *नरेंद्र आचार्य* तथा सीपीआई (मार्क्सवादी) से जुड़ी *सुमित्रा चौपड़ा* सहित अनेक नेताओं ने सभा को संबोधित किया।
*संघर्ष जारी रहेगा*
मनरेगा बचाओ मोर्चा ने दो टूक कहा कि VB–GRAM-G “विकसित भारत” के नाम पर अधिकार आधारित कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को खत्म कर रहा है। जब तक मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया जाएगा और VB–GRAM-G को रद्द नहीं किया जाएगा, तब तक देशभर में लोकतांत्रिक प्रतिरोध, जनसंघर्ष और सामाजिक लामबंदी जारी रहेगी।









































